सोमवार, 21 अगस्त 2017

झुक न पायेगा कभी झंडा वतन का ।

---- ------------ग़ज़ल----------------

      झुक न पायेगा कभी झंडा वतन का ।
      है जवां हर नागरिक  बंदा  वतन का । 
     
      मात देगे दुशमनों की  चाल को अब ।
      ले चुके हम खून से बदला वतन का ।
     
      राहे  मुश्किल  है जरा  हिन्दोस्तां  की।
      जीत लाना हो तुम्ही तमग़ा वतन का ।
     
      कल बनेंगे रीढ़ हम निज देश की भी ।
      जान दे टालेंगे हम  ख़तरा वतन  का ।

      रोक देंगे आ रही  हर  मुश्किलों  को ।
      हल करेगें हम स्वयं झगड़ा वतन का ।

      छोड़ करके पश्चिमी अब सभ्यता  हम ।
      चल करे प्रयोग निज कपड़ा वतन का । 
  
      हिन्द की गरिमा सदा रकमिश बढ़ाना ।
      जान दे, देना कठिन  पहरा  वतन का ।  

                         Ram Kesh Mishra

   

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