रविवार, 20 अगस्त 2017

वो गुनेगारों से सौदा कर रहे

                            ग़ज़ल

     दोस्ती की राह  पर  जो  चल  रहे  मेरे  लिए ।
     वो  गुनेगारों  से  सौदा   कर  रहे   मेरे  लिए ।

     है  मुझे   मालूम  उनकी   रंजिशें  कुर्बानियाँ ।
     दर्द   जैसी  आह  बेशक़  भर  रहे  मेरे  लिए ।

     वो  गुनाहों  की  बनाकर  एक  लंबी   दास्ताँ ।
     बेगुनाही  की  वज़ह  से  जल  रहे  मेरे  लिए ।

     इश्क़ की हर बाजियाँ उनको जिताता मै रहा ।
     हर ख़ुसी उनको मिली गम पल रहे मेरे  लिए ।

     दिल लुटाकर लूट लेने का  उन्हें भी शौक़ है ।
     झूठ की बुनियाद पर  वो  मर  रहे मेरे  लिए ।

     इश्क़ का सँगदिल जमाना  माँगता  साबूत है ।
     और वो भी आजकल जो मर रहे  मेरे  लिए ।

     दर्द की रकमिश सुनामी जिंदगी मे  देखकर ।
     हाथ  हाथों से  छुड़ा  वो  डर  रहे  मेरे  लिए ।

                         Ram Kesh Mishra

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