ग़ज़ल
दोस्ती की राह पर जो चल रहे मेरे लिए ।
वो गुनेगारों से सौदा कर रहे मेरे लिए ।
है मुझे मालूम उनकी रंजिशें कुर्बानियाँ ।
दर्द जैसी आह बेशक़ भर रहे मेरे लिए ।
वो गुनाहों की बनाकर एक लंबी दास्ताँ ।
बेगुनाही की वज़ह से जल रहे मेरे लिए ।
इश्क़ की हर बाजियाँ उनको जिताता मै रहा ।
हर ख़ुसी उनको मिली गम पल रहे मेरे लिए ।
दिल लुटाकर लूट लेने का उन्हें भी शौक़ है ।
झूठ की बुनियाद पर वो मर रहे मेरे लिए ।
इश्क़ का सँगदिल जमाना माँगता साबूत है ।
और वो भी आजकल जो मर रहे मेरे लिए ।
दर्द की रकमिश सुनामी जिंदगी मे देखकर ।
हाथ हाथों से छुड़ा वो डर रहे मेरे लिए ।
Ram Kesh Mishra
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