गीतिका
इश्क़ कोई ख़ैरात नही है ।
झूठी हर सौग़ात नही है ।।
मेरे तेरे प्यार मे यारा ।
पहले जैसी बात नही है ।।
मै तो शायद बदल गया हूं
पर तुझमे जज़्बात नही है ।।
और आंधियां ग़म की सहता
इस दिल के हालात नही है ।।
यादों मे तन्हाई ना हो ।
ऐसी कोई रात नही है ।।
अश्को से भीगा रहता हूं
सावन की बरसात नही है ।।
और दुखो को सह पाऊँ मै ।
अब मेरी औकात नही है ।।
राम केश मिश्र