ग़ज़ल।मैं भी सितारा।
मैं भी था सितारों में जगमगाने वालों ।।
थम जाने दो आंशू गीत गाने वालो ।।
अपने लब्ज़ो की बात तो बया कर दू ।
सुना देना तुम भी किस्सा सुनाने वालों ।।
मुश्किलें बहुत हैं अब तो समझ जाओ ।
कब समझोगे मुझको गम में रुलाने वालों ।।
जिन्दा रहा तो जिंदगी बेमौत मार डाली ।
सुन मेरे ज़नाज़े पर यूँ मुस्कराने वालों ।।
मेरी ह्मवफ़ा पर यक़ीन नही है तुमको ।
अपनी बेवफ़ाई पर भी मुस्कराने वालों ।।
अपनी आज़ादी की खुशियां मना लेना तुम ।
आग मद्दिम ही लगाना जिन्दा जलाने वालों ।।
कुछ संगदिल भी देखेगे उस धुँये का जलवा ।
आ गये थे कब्र पर खुसबू चढ़ाने वालों ।।
कब तलक लड़ता मैं वक्त की उस मार से ।
दुश्मनों से मिल गये मुझको जिलाने वालों ।।
जनाजा तो निकल गया इंतक़ामे प्यार में ।
तुम्हारे सिर्फ आँसू ,ऐ आंशू बहाने वालों ।।
बुझेगा नही धुँआ ये आकाश तक जायेगा ।
सितारों में रहूंगा मैं ऐ मुझको मिटाने वालों ।
कही न झुके सर मुहब्बत के शिवा रकमिश ।
देता हूं दुआ कब्र पर सर को झुकाने वालों ।।
राम केश मिश्र