ग़ज़ल ।आइना आँख का तेरा मुझे बेघर बना देगा ।
इरादे इश्क़ में बेसक दिले बंजर बना देगा ।
आइना आँख का तेरा मुझे बेघर बना देगा ।।
बहेगा एक दिन तेरे जुदाई में गम-ए-आँसू ।
चुभेगा रात दिन जख़्मी कोई खंजर बना देगा ।।
लक़ीरें हाथ मत देख़ो भरोसा रख खुदाई पर ।
रहा ये प्यार जो सच्चा गमे मंज़र बना देगा ।।
करोगे लाख़ अब कोशिस न आऊँगा दुबारा मैं ।
नकामे इश्क़ इस दिल को कोई लंगर बना देगा ।।
बचूंगा खाक़ मैं मसलन तेरी तन्हाइयां अच्छी ।
जबाना तो तेरी नजरों को ही नश्तर बना देगा ।।
दुआओं से सुना है कि किस्मत भी बदलती है ।
साहिल तू बना रकमिश'समन्दर वो बना देगा ।।
©© राम केश मिश्र
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