ग़ज़ल। यही दस्तूर होता है ।
जिसे चाहो मुहब्बत में वही मजबूर होता है ।
रहे तन्हा,उदासी ,गम बड़ा मशगूल होता है ।।
मिलेगीं एक पल खुशियां नजर भर अश्क़ आयेंगे ।
उम्रभर फासले मिटते मग़र वह दूर होता है ।।
बनेंगे रोज़ यादों के झरोंखे चाँद में चेहरा ।
यही सच है मुहब्बत का यही दस्तूर होता है ।।
ख़ुशी के एक लम्हे जो हमे जीना सिखाएंगे ।
बनेगे जिंदगी के गम ज़रा भरपूर होता है ।।
ख्वाबो की जमी पर ही आहे ऱोज उभरेंगी ।
मिले जो ख़ुशनुमा साहिल असल में दूर होता है ।।
मंजिलें पास ही होंगी मिलेंगे रास्ते खुद से ।
जिंदगी कट भी जाये पर नही मंजूर होता है ।।
मिलेंगी दर्द की मजलिश बेशक गम के मंजर भी ।
यकीनन जख्म हो ताज़ा गमे नासूर होता है ।।
करो तुम कूँच साहिल से "रकमिश"बेवफा दुनिया ।
यहा नादान दिल वाले नशेमन चूर होता है ।।
@राम केश मिश्र