मंगलवार, 13 अक्टूबर 2015

।।शेर।।ख़ामोशियाँ।।

            ।।शेर।।ख़ामोशियाँ।।
                            R.K.MISHRA

तेरा खामोश होना तो मुहब्बत का कोई सुबूत नही ।।
यहा गुनाह करके भी लोग बड़े खामोश रहते है ।।

हुनर वे जानते होंगे मेरा खामोशिया पढ़ने का ।।
उन्हें शक है इसी से अब चेहरा वो छिपाते है ..

जरा तुम फांदकर देखो मुहब्बत में दीवालों को ।।
ख़ामोशी के न जाने फिर कितने मोड़ आयेगे ।।

बहुत से मोड़ आते है दरिया से किनारों तक ।।
तन्हा गम ख़ामोशी तो महज है राह मंजिल के .

किसी से प्यार के दरम्यां कभी खामोश मत रहना ..
तेरा ख़ामोश रहना ही उसे सितमगर बना देगा ..

तेरी नजदीकियों से तो ग़मो के फ़ासले अच्छे .
वहा खामोश होंगे तुम मुझे परवाह न होगी .

तेरा खामोश रहना भी तेरी रौनक बढ़ा देता .
मग़र आसान इससे दिल की राह न होगी ....

किसी दिन देख लेना तुम हमारे दिल के दर्पण में .
तुम्हारा रूप ही तुमसे हाले दिल सुना देगा ..

                                  ×××

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