शनिवार, 29 मार्च 2014

*लम्हा*

                 *लम्हा*

हर लम्हे मे तेरे याद की सौगात हैं ।।
मै और मेरे दिल की नाजुक हालात हैं ।।1।।

अपने तकदीर की शिकवा करूँ मै कब तक।।
हर कोई गमगीन हैं जो भी मिला हैं अब तक ।।2।।

लम्हा लम्हा दिल पर मेरे मुस्कुराता हैं ।।
दिल तो बेबस हैं यहां तन्हा बिताता है ।।3।।

रंजिश तनिक नही हैं तन्हाइयों के मारे ।।
जब जिंदगी से जीते तो दिल्लगी से हारे ।।4।।

रविवार, 23 मार्च 2014

*नज़र*

                  *नज़र*

कभी जिनको नजरों मे छिपा रखा था मैंने  ,
वही गैरो के साथ मुस्कुराते नज़र आयें हैं ।।1।।
                     ***

बड़ी मुद्दत थी उन्हें दिल मे बसाने की कब से,
नज़र मिली तो चेहरा छिपा बैठे थे ।।2।।

                     ***

तखलीफ़ तो हुई उनकी बेहयाई से ,
उन्हें तो मौका मिला तन्हाई मिटा लेने का ।।3।।
                      ***         

बेकसूर थी नजरें जो उनकी चाह कर बैठी ,
कसूर तो दिल का हैं जो उन्हें अपना समझ बैठा ।। 4।।    

                       ***

*इश्क*

                 *इश्क*

बड़ी तखलीफ़ होगी सबाबे इश्क मे तुमको ,
प्यार को प्यार रहने दो इसे महसूस मत करो ।।1।।
                     ***

यदि फिर भी चाहते हो तसल्ली पाना तुम ,
वादा करो कि मुझसे शिकायत नही करोगे ।।2।।

                      ***

तसल्ली मिल जायेगी तुमकों भी राहे इश्क मे ,
पर हरपल दर्दे दिल मे तन्हाई बनी रहेगी ।।3।।
                      ***

हर मोड़ पर मंजिल नज़र तो आयेगी तुमको ,
पर इक कदम भी चलने का मौका नही मिलेगा ।।4।।

                       ***

शनिवार, 22 मार्च 2014

*शायरी-3*

                *शायरी-3*
उम्मीद तो हमें भी थी उनकी बेहयाई की,
खैरियत हैं कि उन्होंने पहले बता दिया ।। 1।।
                  ***
जब मैंने गुजारिश की उनसे प्यार की तो,
मुस्कुराकर बोले ,दिल तो आप का ही हैं ।।2।।

                  ***
आखिर क्या करूंगा मै उनका बेपरवाह दिल  ,
दूसरों के नाम पर धडकेगा तो जहमत होगी ।।3।।

                    ***
मैंने भी कह दिया उनसे गम नहीं हैं मुझको ,
तुम्हारी सहेली भी मुझे उतना ही प्यार करती हैं ।।4।।

                     ***

शनिवार, 15 फ़रवरी 2014

*आरज़ू*


लोग कहते हैं कि जिंदगी सवर जाती हैं ,
कोई मिल जायें तो जिँदगी गुजर जाती हैं
ऐ मेरे दोस्त कोई न मिले किसी से ,
वरना जीने की आरजू बिखर जाती हैं ,

                      ***

उन्हें प्यार करो और एतराज न हो ,
उनका इंतज़ार करो एतराज न हो ,
ऐ दोस्त गम मिले तो मिले मुझको ,
वे खुशियों की बौछार करें एतराज न हो ,

                      ***

हर सीने मे दिल धड़कने वाले हैं ,
हर चाहत मे लोग तडपने वाले है  ,
अधूरी रह जाती हैं आरज़ू ऐ दोस्त ,
मिलकर भी लोग बिछड़ने वाले हैं ,

                    ***
                   

*आरज़ू*


लोग कहते हैं कि जिंदगी सवर जाती हैं ,
कोई मिल जायें तो जिँदगी गुजर जाती हैं
ऐ मेरे दोस्त कोई न मिले किसी से ,
वरना जीने की आरजू बिखर जाती हैं ,

                      ***

उन्हें प्यार करो और एतराज न हो ,
उनका इंतज़ार करो एतराज न हो ,
ऐ दोस्त गम मिले तो मिले मुझको ,
वे खुशियों की बौछार करें एतराज न हो ,

                      ***

हर सीने मे दिल धड़कने वाले हैं ,
हर चाहत मे लोग तडपने वाले है  ,
अधूरी रह जाती हैं आरज़ू ऐ दोस्त ,
मिलकर भी लोग बिछड़ने वाले हैं ,

                    ***
                   

सोमवार, 10 फ़रवरी 2014

*शायरी-2*


                ***
दिल और दिल की बात  न कर ।
हर किसी से मुलाकात न कर ।
बेशक तन्हा ही है  तुम्हारे हिस्से मे ।
बेवजह आँशुओ को बर्बाद न कर ।

                   ****

बड़ी उम्मीद थी तेरे प्यार से मुझको ।
बड़ा प्यार था तेरी माशूमियत पर ।।
तोड़ दिया दिल मेरा तुमने आज ।
तरस आता हैं मुझे मेरी माशूमियत पर ।।

शनिवार, 8 फ़रवरी 2014

*शायरी -1*


हजारों बार गिरा हैं गुलदस्ता गुलदान से बाहर ।
करे क्या माली हवायें आ ही जाती हैं ।।

                     ***

गुजार देते हम भी तुम्हारे साथ कुछ पल ।
करे क्या जबाना मिलने नहीं देता ।।

                      ***
मिलेंगी वादियों मे मेरे आने की आहट ।
जरा गौर से सुनियेगा आवाज़ मद्दिम होगी ।।

                       ***

मजबूर दिल को बेदर्द मत समझना ।
दर्द होता हैं मगर कोई समझता नहीं ।।

                        ***

दिल को तसल्ली देता हूँ कि बरसेगा कभी सावन ।
पर बरसों गुजर गये सावने इन्तज़ार मे ।।

प्यार

वक्त ही काफ़ी नहीं इंतजार के लिए ।
लब्ज़ ही काफी नहीं इजहार के लिए ।
जिंदगी भी कम पड़ जाती हैं दोस्तो ,
सिर्फ दिल ही काफ़ी नहीं हैं प्यार के लिए ।।


vaqt hi kafi nhi intjar k liye .
lafj hi kafi nhi ijhar k liye .
jindgi bhi kam pad jati hai dosto,,
sirf dil hi kafi nhi hai pyar k liye ..




नशा ए इश्क

ग़ज़ल   नशा ए इश्क अब छोड़ा न जाए ।  जमाने से मगर उलझा न जाए ।   बड़ी मासूम हैं उसकी अदाएं,   कि मुझसे और अब देखा न जाए ।   गरीबों ...