,गीतिका ।
जो जग मे जीवन पाता है ।
भौतिकता मे ढल जाता है ।
राजा हो या दुर्बल निर्धन ।
सब का सुख दुख से नाता है ।
कष्टों मे साहस भर दे जो ।
वह सच मे अपना भ्राता है ।
नर तन पशु पंछी जड़ चेतन ।
दुख पाते ही मुरझाता है ।
जीवन इक सिक्का दो पहलू ।
रकमिश खुद को समझाता है ।
Ram Kesh Mishra