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गुरुवार, 8 जून 2017
मंगलवार, 6 जून 2017
यहाँ पर मुस्कुराने मे।
ग़ज़ल -यहाँ पर मुस्कुराने मे
तलाशे इश्क़ मे निकला जफ़ा के आशियाने मे ।
बड़ी तकलीफ़ पाया हूं यहाँ पर मुस्कुराने मे ।।
मिली जो मतलबी दुनियां तराशेगी मुहब्बत को ।
मुझे मालूम है लेकिन मज़ा है आजमाने मे ।।
वफ़ा के नाम पर उनको खुदा ही मान बैठा हूं ।
मुझे दिलचस्पी है उनमे उन्हें किस्सा सुनाने मे ।।
हँसेगी देखकर दुनियां जलता घर ग़रीबों का ।
मदद करता नही कोई जरा कर्जा चुकाने मे ।।
न रिस्ते है न रिस्तों की कोई परवाह करता है ।
नही जज़्बात है क़ायम बेक़ाबू इस जमाने मे ।।
हक़ीक़त मे कहर बरपा जवां है गमसुदा आलम ।
कहाँ तकलीफ़ होती है किसी का दिल दुखाने मे ।।
मुहब्बत मे वकीली का मुझे एतराज है रकमिश ।
बहें है आँख से आंसू जरा सा गुनगुनाने में ।
राम केश मिश्र
गुरुवार, 1 जून 2017
मेरे कातिलों को ख़बर कीजिये ।
ग़ज़ल।। मेरे कातिलों को ख़बर कीजिये ।
वक्त काफ़ी है थोड़ा सबर कीजिये ।
मेरे कातिलों को ख़बर कीजिये ।।
दर्द का शौक़ पाला है हमने यहाँ ।
ग़म उन्हें क्यो उनको निडर कीजिये ।।
वक़्त रुकता नही है खुदा के लिये ।
वक्त आये तो उनको इधर कीजिये ।।
डूब जायेगे आएगा जब ज़लज़ला ।
तब तलक दर्द को बेअसर कीजिये ।।
कोई सीसा नही टूट जाए जो दिल ।
मौत वालो को कह दो ज़िगर कीजिये ।।
इस मुहब्बत मे वे भी गुनेहगार है ।
वक्ते दर आज उनको नज़र कीजिये ।।
मंजिले पास आएगी रकमिश' तिरी ।
इश्क़ तन्हा है थोड़ा सफ़र कीजिये ।।
राम केश मिश्र
रविवार, 28 मई 2017
ग़ज़ल। मेरा यार मुझसे ख़फ़ा हो रहा है ।
गजल/मेरा यार मुझसे ख़फ़ा जो रहा है ।
वज़्न- १२२-१२२-१२२-१२२
मेरा जख़्म फ़िर से रवां हो रहा है ।
मेरा यार मुझसे ख़फ़ा हो रहा है ।।
जिसे सब्र की राह मैने दिखाया ।
वही गैर पर अब फ़ना हो रहा है ।।
कभी आँख मे अश्क़ आये नही थे ।
सुरू दर्द का ज़लज़ला हो रहा है ।।
मुहब्बत मे मेरे बना था मसीहा ।
किसी गैर का वो ख़ुदा हो रहा है ।।
तिरा फ़ैसला दर्द देगा यक़ीनन ।
बड़े शौक़ से तू जुदा हो रहा है ।।
वफ़ाई तुम्हें रास आयी नही क्यों ।
वफ़ा था कभी बावफा हो रहा है ।।
न जा आज रकमिश बड़ी बेख़ुदी है ।
जरा पास हो तो दवा हो। रहा है ।।
राम केश मिश्र
बन गया पत्थर ज़माना ।
ग़ज़ल (बह्र रहित)
बन गया पत्थर ज़माना ।
दे रहा सबको यहाँ ख़ुशियों का इक घर ज़माना ।
बात जब आयी मिरी तो बन गया पत्थर ज़माना ।।
मैं निखालिश प्यार पर कर भरोसा चल रहा था ।
हँस रहा दिल पर मेरे जख़्म को देकर ज़माना ।।
टूट तो वैसे गया हूं दर्द -ऐ -दिल हालात से मैं ।
अब चुभोता जा रहा क्यो बेवज़ह नस्तर ज़माना ।।
अश्क़ आंखों मे नही फ़िर भी कुरेदे जा रहा हूं ।
शक़ उसे है आज़माता जख़्म पर खंज़र ज़माना ।।
लड़ रहा तन्हाइयों से इश्क़ का मारा मुअक्किल ।
हो गया ख़ामोश मसलन देखता मंजर ज़माना ।।
कर रहा बेशक़ गुज़ारिश रूह मेरी बख़्स दे अब ।
जबकि पीछे पड़ गया है हाथ ही धोकर ज़माना ।।
मन्नतें माँगी थी रकमिश' उम्र भर बस प्यार की ।
कर दिया बदनाम घायल इश्क़ को लेकर ज़माना ।
©राम केश मिश्र
ग़ज़ल । मुझे हर शख्स प्यारा है ।
ग़ज़ल। मुझे हर शक़्स प्यारा है ।।
मापनी-1222 1222 1222 1222
किसे मांगू ख़ुदा से मैं यहाँ हर शक़्स मेरा है ।
जिसे मै रहनुमा समझा वही दिल का लुटेरा है ।।
मिला जो अज़नबी मुझको दिलों का घर दिखा बैठा ।
मेरे दिल मे जरा झाँको लुटेरों का बसेरा है ।।
गये वो भूल तन्हा दिल उन्हे खुशियां मिली बेसक ।
मेरे आग़ोश मे फ़ैला जफ़ा- ऐ- ग़म का घेरा है ।।
दिखायी प्यार की राहें जलाकर रौशनी दिल की ।
उन्हें मंजिल मिली अबतक मेरे घर पर अंधेरा है ।।
कहाँ तक ढूढ़ कर लाता दिलों के लाख़ टुकड़ों को ।
रहा जो हौसला बाक़ी ग़मों मे ही बिखेरा है ।।
ज़रा नज़दीक आ देखों खुदे है फ़लसफ़े तेरे ।
तुम्हारे ज़ख्म इस दिल पर अब तक जो उकेरा है ।।
वफ़ाई लाख़ तू कर ले मिलेगा ख़ाक ही रकमिश, ।
ख़ुदा का है खुदा लेगा न मेरा है न तेरा है ।।
राम केश मिश्र
मुझे आज अपनी कहानी सुना दो ।
ग़ज़ल
ग़मों की बेमानी जफ़ाएँ भुला दो ।
मुझे आज अपनी कहानी बता दो ।।
बहे अश्क़ आँखे हुई बेमज़ा है ।
दिले दरमियाँ आज पर्दा हटा दो ।।
ख़ुदा के लिये आज कहके हक़ीक़त ।
वफ़ा बेवफ़ा की मुहब्बत सुना दो ।।
हुई शाम आयी अँधेरी घड़ी है ।
मिरे साथियां बेक़सी को भुला दो ।।
ज़रा सी कठिन है नयी राह लेकिन ।
करो फ़ैसला जामे उल्फत पिला दो ।।
सुरू तो करोगे नयी ज़िन्दगी फ़िर ।
हमारे लिये ही जरा मुस्कुरा दो ।।
तिरे दर्द की है दवा सिर्फ़ रकमिश'।
मिरे सांस से तुम ज़रा गुनगुना दो ।।
रकमिश=राम केश मिश्र
गुरुवार, 25 मई 2017
हो गये अपने पराये लोग सब ।
ग़ज़ल । हो गये अपने पराये लोग सब ।
हो गये अपने पराये लोग सब ।
बेबसी मे है भुलाये लोग सब ।।
प्यार मे दिल को बिछाना था उन्हें ।
दर्द मे जबकि न आये लोग सब ।।
जीत मे खुशियों के बादल छा गये ।
हार मे नजरें चुराए लोग सब ।।
जख़्म मे मरहम लगाना था जिन्हें ।
बेरहम बन दिल दुखाये लोग सब ।।
वक्त की थी बन्दिशें मेरे लिये ।
वक्ते दर कहके न आये लोग सब ।।
अश्क़ के दरिया मे डूबा मै रहा ।
झूठ के आँसू बहाये लोग सब ।।
तोड़ के रश्में वफ़ा रकमिश, यहाँ ।
बेवज़ह वादे निभाये लोग सब ।।
राम केश मिश्र
शनिवार, 6 मई 2017
भैया जीअखबारों से ।
*भैया जी अखबारों से *
बन जाता है देश महान भैया जी अखबारों से ।
चौराहें पर बढ़ती शान भैया जी अखबारों से ।
वे बच्चे भी बेच रहे है जिनको जाना है स्कूल ।
अंधकार में नया विहान भैया जी अखबारों से ।
राजनीति की चर्चाओं पर बढ़ चढ़ कर लेते है भाग
आ जाती सोहदो मे जान भैया जी अखबारों से ।
कुछ है नयी पुरानी खबरें कुछ तो खुद को दुहराती ।
कुछ दिन भूखा रहा किसान भैया जी अखबारों से ।
छुपे हुये आज घरो में वहसी वही दरिंदे सब ।
मै तो करता हूं ऐलान भैया जी अखबारों से ।
रोज योजना की हेडिंग आती जाती रहती है ।
जनता सहती है अपमान भैया जी अखबारों से ।
खाली होता पॉकेट जिनका फुर्सत नही है पढ़ने की
भर जाती है रोज दुकान भैया जी अखबारों से ।
राम केश मिश्र
शुक्रवार, 5 मई 2017
ग़ज़ल।परिंदा एक पाला था ।
ग़ज़ल।परिंदा एक पाला था ।
वफ़ा की शाख़ पर तुमसा परिंदा एक पाला था ।
नया फ़िर जख़्म दे बैठा दरिंदा एक पाला था ।
गया वो लूटकर बेशक़ मज़ा मेरी मुहब्बत का ।
ख़फ़ा दुनियां से होकर के बासिन्दा एक पाला था ।
हिफ़ाजत क्या करेगा वो जिसे ख़ुद की नही चिंता ।
मौत से कम नही निकला कि जिंदा एक पाला था ।
नफ़ासत ही मिली दिल को रही ताउम्र तन्हाई ।
दवा ऐ दर्द मे गम का पुलिंदा एक एक पाला था ।
रवां साहिल से होकर के बहाया आँख से आँसू ।
मिला तालाब पर सूखा कलिंदा एक पाला था ।
दिवाना था, सुहाना था,रूहानी थी कशिश उसकी ।
जुदा दुनियां से था रकमिश चुनिंदा एक पाला था ।।
राम केश मिश्र
नशा ए इश्क
ग़ज़ल नशा ए इश्क अब छोड़ा न जाए । जमाने से मगर उलझा न जाए । बड़ी मासूम हैं उसकी अदाएं, कि मुझसे और अब देखा न जाए । गरीबों ...
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ग़ज़ल।मौत भी अपमान की ।। खिल्लियां उड़ने लगी है ऐ खुदा ईमान की । जीत अब होने लगी है बेवज़ह बेईमान की ।। मुजरिमों के लिये है इज्जतें बेशक़ रिह...
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ग़ज़ल।मैं भी सितारा। मैं भी था सितारों में जगमगाने वालों ।। थम जाने दो आंशू गीत गाने वालो ।। अपने लब्ज़ो की बात तो बया कर दू । ...
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ग़ज़ल।। मुहब्बत जब नज़र आती ।। गवाही की जरूरत क्या जमानत जब नजर आती । वफ़ाई की तमन्ना क्यों मुहब्बत जब नज़र आती ।। गुरु है वो , खुदा , र...