शनिवार, 6 मई 2017

भैया जीअखबारों से ।

                 *भैया जी अखबारों से *

बन जाता है देश महान भैया जी अखबारों से ।
चौराहें पर बढ़ती शान भैया जी अखबारों से । 

वे बच्चे भी बेच रहे है जिनको जाना है स्कूल ।
अंधकार में नया विहान भैया जी अखबारों से ।

राजनीति की चर्चाओं पर बढ़ चढ़ कर लेते है भाग
आ जाती सोहदो मे जान भैया जी अखबारों से ।

कुछ है नयी पुरानी खबरें कुछ तो खुद को दुहराती ।
कुछ दिन भूखा रहा किसान भैया जी अखबारों से ।

छुपे हुये आज घरो में  वहसी वही दरिंदे सब ।
मै तो करता हूं ऐलान भैया जी अखबारों से ।

रोज योजना की हेडिंग आती जाती रहती है ।
जनता सहती है अपमान भैया जी अखबारों से ।  

खाली होता पॉकेट जिनका फुर्सत नही है पढ़ने की
भर जाती है रोज दुकान भैया जी अखबारों  से । 

                                       राम केश मिश्र

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