मंगलवार, 2 दिसंबर 2014
गजल।।हिसाब।।
सोमवार, 1 दिसंबर 2014
गजल।।एक दिल।।
गजल ।।एक दिल।।
दिल एक था पर टुकड़े हजार हो गये ।।
जब हर जगह दिल के बाजार हो गये ।।1।।
ओश की तरह ढह गये छोड़ कर पलके ।।
अपने आसू भी आजकल गद्दार हो गये ।। 2।।
न जाने कितनी गुमनाम ही दफन हो गयी हसरते ।।
जख्म लगा तो दिल बेकार हो गये ।। 3।।
वक्त ही वक्त था पर अपना न था ।।
जब हम तन्हाई के शिकार हो गये ।।4।।
खत्म हो गया सिलसिला अपनाने का ए दोस्त !!
जब खुद ही बिछडने के आसार हो गये ।। 5।।
रविवार, 30 नवंबर 2014
।।तलाश।।
शुक्रवार, 28 नवंबर 2014
वक्त
।।वक्त।।
मंजिल दूर है तो क्या चल के आजमाना है ।।
वक्त भी कम है और खुद को भी बचाना है ।। 1।।
हौसला रखकर हमें भी जीत लेना है खुशी ।।
और जिंदगी से किया वादा भी निभाना है ।। 2।।
क्या हुआ गर मिले आंख मे आंसू मुझे भी ।।
एक बार ही सही पर दिल को आजमाना है ।। 3।।
रस्तो पर ही रुके है जो समझ कर मंजिले ।।
रास्ता काफी अभी है उनको यह बताना है ।। 4।।
रास्ते इस जिंदगी पर लौटना मुमकिन नही ।।
वक्त से पहले हमें भी जिंदगी को पाना है ।। 5।।
डर
।।डर।।
प्यार था पर प्यार मे इन्तकाम का डर था ।।
जो मिला बस उसी इल्जाम का डर था ।। 1
वरना फिक्र न करता मैं भी वफाओ की ।।
जो हुआ बस उसी अंजाम का डर था ।। 2
तभी तो रह गये किनारों पर डूब कर ।।
नाम भी तो न मिला बदनाम का डर था ।। 3
औरों ने तो जी लिया खुशहाल जिंदगी ।।
मैं ढह गया जबकि मुझे ईमान का डर था ।। 4
ऐ दोस्त !! अब मत डर जीने से जिंदगी ।।
मैं रह गया क्योंकि मुझे अरमान का डर था ।।5
मंगलवार, 25 नवंबर 2014
।।दोस्ती:2।।
।।दोस्ती:2।।
हर किसी ने कह दिया दोस्त है दोस्त है ।।
पर दोस्तों !! ए दोस्ती जीना सिखाती है ।।
गर नही तो फिक्र कर अब ही अपने दोस्तों की ।।
याद ही वह शौक है जो हमें अपना बनाती है ।।
दोस्ती की दुकानों पर मिले तो क्या हुआ ।।
दूर रहकर भी बडी दूरी मिटाती है ।।
इल्म कर ले हर कोई है दोस्त के काबिल ।।
गैर के खातिर ये तो किस्मत लुटाती है ।।
कौन कहता है यहाँ मोहलत नहीं मिलती मुझे ।।
ये तो उम्र भर दिल में रहना सिखाती है ।।
बुधवार, 19 नवंबर 2014
।। एक दिन ।।।
।। विश्वास ।।
।।एक दिन ।।
मंगलवार, 18 नवंबर 2014
।। उन्हें डर था ।।
।। उन्हें डर था ।।
उन्हें डर था और मुझे भी ।
वे मुझसे डरते थे ,
मै खुद से डरता था ।। 1।।
कहीं वे खो न जायें आखो में ।।
औऱ मुझे मेरी ही ,
खबर न थी । 2।।
कुछ दिन परवाह किया मैने ।
और वो भी अब ,
वेपरवाह हो गए।। 3।।
हद हो गयी तब मेरे उम्मीद की ।
जब मुस्कुरा दिये ,
किसी गैर के होकर ।।4।।
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