बुधवार, 23 अप्रैल 2014

अश्क़

                        अश्क

किसी हमराह से जाकर हमारी अनकही पूछो ,,
उसके अश्क कह देगें सारी दास्तां दिल की ।। 1।।

चले थे हम भी इक काफिले के साथ दोस्तों,, 
सिर्फ अश्क ही बचे सबके लौट कर लाने के लिये ।। 2।।

इन बुझदिलो की भीड़ में वफ़ा की उम्मीद न कर ,,
ये सब तो बेवफाई के अश्क से पलते है ।।3 ।।

प्यार में अश्कों  की कोई कीमत नही होती यहाँ ,,
बेवजह इन आँसुओं को बर्बाद न कर हमवफा ।।4।

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सोमवार, 7 अप्रैल 2014

* फेसबुक*

                 *फेसबुक*

बहुत आसान होता हैं किसी से दोस्ती करना ,
परन्तु दोस्त का मतलब हमे मालूम नही होता ।।1।।
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फेसबुक पर तो चैटिंग करते हैं बड़े प्यार से ,
सामने मिलते हैं तो नज़रे चुराते है ।।2।

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जानते हैं कि हर तस्वीर झूठी हैं फेसबुक की,
फिर भी वफाई की उम्मीद किये बैठे हैं ।।3।।
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गुजार देते हैं पूरी रात  नेट और फेसबुक पर ,
सुबह होते ही खुद से शिकायत करते हैं ।।4।।
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फेसबुक से कोई उम्मीद न कर ए मेरे दोस्त ,
हर किसी की ख्वाहिश यहाँ पूरी नहीं होती ।।5।।
 
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शुक्रवार, 4 अप्रैल 2014

*नाम*

                     *नाम*

बड़ा आसान होता हैं किसी से वायदा करना , 
ये वक्त है कि सबको झूठा बना देता हैं ।।1।।

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हमें अब सोचना होगा चुनावों के नतीजों पर ।।
वरना तुम्हारे नाम से कोई और जाना जायेगा ।।  2।।
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पहचानो तुम अपने ओट की कीमत यारों ।।
वक्त बदलेगा पर तुम्हारा नाम न होगा ।।3।।  
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आखिर क्यों लगाते है तुम्हारे ओट की की कीमत । 
जबकि मालूम हैं हर कोई बिकाऊ नही होता ।।4।।
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अगर तुम चाहते हो कि तुम्हारा नाम न डूबे ।।
अपने दिल की सुनकर के सही सरकार लाओ तुम ।।5।।

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बुधवार, 2 अप्रैल 2014

*इन्तज़ार*

                *इन्तज़ार*

तुम चाहते हो खेलना मेरे नादान दिल से , ।।
और मुझे भी उसी दिन का इन्तजार है ।।1 ।।
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जब बन ही गया है इरादा मेरा दिल तोड़ने  का ,।। 
तो झूठे प्यार मे अदायें क्यों दिखाती हो ।।2।।
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जब मुझे हाशिल न हो सकेगा तुम्हारा साथ , ।। 
तो मै तेरी याद का इन्तज़ार क्यों करूँ ।।3।।
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और खत्म हो गया तेरा इन्तज़ार करना ,।। 
क्योंकि मुझे भी फुर्सत नही अपने दिल के गमो से ।।4।।

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मंगलवार, 1 अप्रैल 2014

*वादा*

                    *वादा*

जब तुम ही चले गये दिल तोडकर मेरा , 
तो अब मै तुम्हारे वादे का क्या करूँ ।। 1।।

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फिर भी  प्यार है तेरी बेवफाई से मुझको ,
हैं  तेरा वादा तो मुझको निभाना होगा ।।2।।

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तुम तो चले गये इक वादा छोड़कर अपना ,
मुझे तो वादा करने का मौक़ा ही नहीं दिये ।। 3।।

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मेरा भी वादा हैं न भूल पायेंगे तुमकों तब तक ,
जब तक तेरी याद तक बेवफा न होगी ।।4।।

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*उम्मीद*

                *उम्मीद*

मुझे मालूम था कि खफ़ा होगे मुझसे ,
पर उम्मीद न थी उनसे बेवफाई की ।।1।।
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जब किस्मत ही आजमाने लगी हैं मुझको ,
तो तेरा आजमाना भी तेरी कसम वाजिब हैं  ।।2।।
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हर बार तो यही हुआ मेरे दिल के साथ ,
जब भी लगाया सिर्फ जख्म मिला हैं इसको ।। 3।।
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अब मेरी वजह से तखलीक न होगी तुमको ,
मेरी नाउम्मीदी पर खुशियाँ मना लेना तुम ।।4।।
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शनिवार, 29 मार्च 2014

*लम्हा*

                 *लम्हा*

हर लम्हे मे तेरे याद की सौगात हैं ।।
मै और मेरे दिल की नाजुक हालात हैं ।।1।।

अपने तकदीर की शिकवा करूँ मै कब तक।।
हर कोई गमगीन हैं जो भी मिला हैं अब तक ।।2।।

लम्हा लम्हा दिल पर मेरे मुस्कुराता हैं ।।
दिल तो बेबस हैं यहां तन्हा बिताता है ।।3।।

रंजिश तनिक नही हैं तन्हाइयों के मारे ।।
जब जिंदगी से जीते तो दिल्लगी से हारे ।।4।।

रविवार, 23 मार्च 2014

*नज़र*

                  *नज़र*

कभी जिनको नजरों मे छिपा रखा था मैंने  ,
वही गैरो के साथ मुस्कुराते नज़र आयें हैं ।।1।।
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बड़ी मुद्दत थी उन्हें दिल मे बसाने की कब से,
नज़र मिली तो चेहरा छिपा बैठे थे ।।2।।

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तखलीफ़ तो हुई उनकी बेहयाई से ,
उन्हें तो मौका मिला तन्हाई मिटा लेने का ।।3।।
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बेकसूर थी नजरें जो उनकी चाह कर बैठी ,
कसूर तो दिल का हैं जो उन्हें अपना समझ बैठा ।। 4।।    

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*इश्क*

                 *इश्क*

बड़ी तखलीफ़ होगी सबाबे इश्क मे तुमको ,
प्यार को प्यार रहने दो इसे महसूस मत करो ।।1।।
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यदि फिर भी चाहते हो तसल्ली पाना तुम ,
वादा करो कि मुझसे शिकायत नही करोगे ।।2।।

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तसल्ली मिल जायेगी तुमकों भी राहे इश्क मे ,
पर हरपल दर्दे दिल मे तन्हाई बनी रहेगी ।।3।।
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हर मोड़ पर मंजिल नज़र तो आयेगी तुमको ,
पर इक कदम भी चलने का मौका नही मिलेगा ।।4।।

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शनिवार, 22 मार्च 2014

*शायरी-3*

                *शायरी-3*
उम्मीद तो हमें भी थी उनकी बेहयाई की,
खैरियत हैं कि उन्होंने पहले बता दिया ।। 1।।
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जब मैंने गुजारिश की उनसे प्यार की तो,
मुस्कुराकर बोले ,दिल तो आप का ही हैं ।।2।।

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आखिर क्या करूंगा मै उनका बेपरवाह दिल  ,
दूसरों के नाम पर धडकेगा तो जहमत होगी ।।3।।

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मैंने भी कह दिया उनसे गम नहीं हैं मुझको ,
तुम्हारी सहेली भी मुझे उतना ही प्यार करती हैं ।।4।।

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नशा ए इश्क

ग़ज़ल   नशा ए इश्क अब छोड़ा न जाए ।  जमाने से मगर उलझा न जाए ।   बड़ी मासूम हैं उसकी अदाएं,   कि मुझसे और अब देखा न जाए ।   गरीबों ...