सोमवार, 26 मई 2014

।।दोस्ती-2।।

                    ।।दोस्ती।। 

जिंदगी  मे  दोस्ती  आसान नही  होती ।।
बस दोस्त होना, दोस्ती की पहचान नही होती ।।1।।

दूर हो, या पास, या हो कोई अजनबी ।।
हर किसी से यह कभी अंजान नही होती ।। 2।।

फर्क कुछ पड़ता नहीं, हो फासले या दूरियां ।।
बेसलूकी पर यह मेहरबान नही होती  ।।3।। 

वसूलों की न सही पर फर्ज़ की जंजीर से  ।।
हैं जुड़ी, फिर भी कभी बेजान  नही  होती  ।।4। । 

प्यार  तो  रुस्वाइयोँ का   एक  लम्हा  हैं ।।
और दोस्ती प्यार पर एहसान नही होती ।।5 ।।

है दिलों की खुशनुमा यह इक तस्वीर वफा की ।।
यह दोस्ती हैं, दोस्त से परेशान नही होती  ।।6।। 
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शुक्रवार, 23 मई 2014

।।यादें।

                    ।।यादे।।
    

बड़ी बेशर्म है यादें बड़ी नफ़रत से आती है ।।
किसी को गम ये देती है किसी का गम भुलाती है ।।1।। 

लिहाजा गर न आये ये बड़ी दिक्कत भी होती है ।। 
किसी के दिल की आहट को यही आकर सुनाती है ।।2।। 

जरूरी है बहुत इसका मगर मजबूर कर देती ।।
रहोगे नींद मे फिर भी चली आहट सी आती हैं ।।3।। 

किसी से पूछ तुम लेना अगर न नींद आती हो ।। 
आती पल दो पल ही पर जीवन भर सतती है ।।4।। 

यादों का सफर है दोस्त ! मिलेगी न तुम्हें फुरसत ।।
मगर यादों में सबकी याद बड़ी मुददत से आती है ।।5।। 

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सोमवार, 19 मई 2014

जिंदगी

                   ।।जिंदगी ।।

जब हमने जीना चाहा कुछ खास  जिंदगी ।।
तब हमको लगी बिल्कुल बकवास  जिंदगी ।।1 ।

जिन पर यकी था मुझको बर्बाद कर गये ।।
अब कैसे करें गैरों पर बिश्वास जिंदगी ।।2।। 

हर अजनबी के तेवर हर दोस्तो की हरकत ।।
कर  रही है सब कुछ एहसास जिंदगी ।।3।।

मै ढूँढने निकला था खुद शाहिलो पर हमदम ।।
अब बन गयी है खुद ही तालाश जिंदगी ।।4।। 

यकीनन तुम्हें भी आ जायेगा यकी यारों ।। 
जब हो जायेगी  गम की आवास जिंदगी ।।5।। 

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रविवार, 18 मई 2014

दोस्ती

दोस्ती इक पल तो इन्तज़ार हम कर नही सकते कभी ताउम्र तो मुमकिन नही है इस हमारी दोस्ती में ।। 1।। फिर भी चाहेंगे तुमकों तुम्हारी तसल्ली के लिये , कि तुम्हें तखलीफ़ न हो इस हमारी दोस्ती मे ।।2।। क्योंकि वक्त तो अपना है नही ,जिंदगी है गैर की , सो इन्तजारो की जगह है न ,इस हमारी दोस्ती में ।।3।। पर यकीनन याद की इक शै जलाता है जिगर , और ताज़ी आहटे है इस हमारी दोस्ती मे ।।4।। लब्ज की कीमत दिलो से तौल ली जाती यहाँ पर, झूठ को मोहलत नही है इस हमारी दोस्ती मे ।।5।। ***

शनिवार, 17 मई 2014

हमदर्द


                  हमदर्द

तुम्हें तो इल्म नही होगा तुम्हारी खुशनसीबी पर ,
कि तुम्हारा नाम भी है हमारी बेमुरौवत जिंदगी मे ।। 1।। 

वरना किसे परवाह है गैरों की इस भीड़ में ,
जबकि महफिलों में भीडो के जलसे निकलते है ।।2।।

अगर हो पास इतना तो ये फासला क्यों है ,   
न जाने कब किसी का बिछड़ने का इरादा हो ।।3।। 

तुम्हें तखलीफ होगी पर तुम्हारी कद्र करता कौन हैं ,   
किसे फुर्सत यहां पर है तेरा हमदर्द बनने का ।।4।।

सहो हर दर्द अपना तुम किसी से गम को मत बाटो  ,
तुम्हारे दर्द का हमदम तुम्हारी जिंदगी ही हैं ।।5।।

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बुधवार, 23 अप्रैल 2014

अश्क़

                        अश्क

किसी हमराह से जाकर हमारी अनकही पूछो ,,
उसके अश्क कह देगें सारी दास्तां दिल की ।। 1।।

चले थे हम भी इक काफिले के साथ दोस्तों,, 
सिर्फ अश्क ही बचे सबके लौट कर लाने के लिये ।। 2।।

इन बुझदिलो की भीड़ में वफ़ा की उम्मीद न कर ,,
ये सब तो बेवफाई के अश्क से पलते है ।।3 ।।

प्यार में अश्कों  की कोई कीमत नही होती यहाँ ,,
बेवजह इन आँसुओं को बर्बाद न कर हमवफा ।।4।

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सोमवार, 7 अप्रैल 2014

* फेसबुक*

                 *फेसबुक*

बहुत आसान होता हैं किसी से दोस्ती करना ,
परन्तु दोस्त का मतलब हमे मालूम नही होता ।।1।।
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फेसबुक पर तो चैटिंग करते हैं बड़े प्यार से ,
सामने मिलते हैं तो नज़रे चुराते है ।।2।

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जानते हैं कि हर तस्वीर झूठी हैं फेसबुक की,
फिर भी वफाई की उम्मीद किये बैठे हैं ।।3।।
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गुजार देते हैं पूरी रात  नेट और फेसबुक पर ,
सुबह होते ही खुद से शिकायत करते हैं ।।4।।
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फेसबुक से कोई उम्मीद न कर ए मेरे दोस्त ,
हर किसी की ख्वाहिश यहाँ पूरी नहीं होती ।।5।।
 
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शुक्रवार, 4 अप्रैल 2014

*नाम*

                     *नाम*

बड़ा आसान होता हैं किसी से वायदा करना , 
ये वक्त है कि सबको झूठा बना देता हैं ।।1।।

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हमें अब सोचना होगा चुनावों के नतीजों पर ।।
वरना तुम्हारे नाम से कोई और जाना जायेगा ।।  2।।
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पहचानो तुम अपने ओट की कीमत यारों ।।
वक्त बदलेगा पर तुम्हारा नाम न होगा ।।3।।  
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आखिर क्यों लगाते है तुम्हारे ओट की की कीमत । 
जबकि मालूम हैं हर कोई बिकाऊ नही होता ।।4।।
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अगर तुम चाहते हो कि तुम्हारा नाम न डूबे ।।
अपने दिल की सुनकर के सही सरकार लाओ तुम ।।5।।

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बुधवार, 2 अप्रैल 2014

*इन्तज़ार*

                *इन्तज़ार*

तुम चाहते हो खेलना मेरे नादान दिल से , ।।
और मुझे भी उसी दिन का इन्तजार है ।।1 ।।
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जब बन ही गया है इरादा मेरा दिल तोड़ने  का ,।। 
तो झूठे प्यार मे अदायें क्यों दिखाती हो ।।2।।
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जब मुझे हाशिल न हो सकेगा तुम्हारा साथ , ।। 
तो मै तेरी याद का इन्तज़ार क्यों करूँ ।।3।।
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और खत्म हो गया तेरा इन्तज़ार करना ,।। 
क्योंकि मुझे भी फुर्सत नही अपने दिल के गमो से ।।4।।

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मंगलवार, 1 अप्रैल 2014

*वादा*

                    *वादा*

जब तुम ही चले गये दिल तोडकर मेरा , 
तो अब मै तुम्हारे वादे का क्या करूँ ।। 1।।

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फिर भी  प्यार है तेरी बेवफाई से मुझको ,
हैं  तेरा वादा तो मुझको निभाना होगा ।।2।।

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तुम तो चले गये इक वादा छोड़कर अपना ,
मुझे तो वादा करने का मौक़ा ही नहीं दिये ।। 3।।

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मेरा भी वादा हैं न भूल पायेंगे तुमकों तब तक ,
जब तक तेरी याद तक बेवफा न होगी ।।4।।

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नशा ए इश्क

ग़ज़ल   नशा ए इश्क अब छोड़ा न जाए ।  जमाने से मगर उलझा न जाए ।   बड़ी मासूम हैं उसकी अदाएं,   कि मुझसे और अब देखा न जाए ।   गरीबों ...