गुरुवार, 25 मई 2017

हो गये अपने पराये लोग सब ।

ग़ज़ल । हो गये अपने पराये लोग सब ।

हो गये अपने पराये लोग सब ।
बेबसी मे है भुलाये लोग सब ।।

प्यार मे दिल को बिछाना था उन्हें ।
दर्द मे जबकि न आये लोग सब ।।

जीत मे खुशियों के बादल छा गये ।
हार मे  नजरें चुराए लोग सब ।।

जख़्म मे मरहम लगाना था जिन्हें ।
बेरहम बन दिल दुखाये लोग सब ।।

वक्त की थी बन्दिशें मेरे लिये ।
वक्ते दर कहके न आये लोग सब ।।

अश्क़ के दरिया मे डूबा मै रहा ।
झूठ के आँसू बहाये लोग सब ।।

तोड़ के रश्में वफ़ा रकमिश, यहाँ ।
बेवज़ह वादे निभाये लोग सब ।।

                             राम केश मिश्र

शनिवार, 6 मई 2017

भैया जीअखबारों से ।

                 *भैया जी अखबारों से *

बन जाता है देश महान भैया जी अखबारों से ।
चौराहें पर बढ़ती शान भैया जी अखबारों से । 

वे बच्चे भी बेच रहे है जिनको जाना है स्कूल ।
अंधकार में नया विहान भैया जी अखबारों से ।

राजनीति की चर्चाओं पर बढ़ चढ़ कर लेते है भाग
आ जाती सोहदो मे जान भैया जी अखबारों से ।

कुछ है नयी पुरानी खबरें कुछ तो खुद को दुहराती ।
कुछ दिन भूखा रहा किसान भैया जी अखबारों से ।

छुपे हुये आज घरो में  वहसी वही दरिंदे सब ।
मै तो करता हूं ऐलान भैया जी अखबारों से ।

रोज योजना की हेडिंग आती जाती रहती है ।
जनता सहती है अपमान भैया जी अखबारों से ।  

खाली होता पॉकेट जिनका फुर्सत नही है पढ़ने की
भर जाती है रोज दुकान भैया जी अखबारों  से । 

                                       राम केश मिश्र

शुक्रवार, 5 मई 2017

ग़ज़ल।परिंदा एक पाला था ।

ग़ज़ल।परिंदा एक पाला था ।

वफ़ा की शाख़ पर तुमसा परिंदा एक पाला था ।
नया फ़िर जख़्म दे बैठा दरिंदा एक पाला था । 

गया वो लूटकर बेशक़ मज़ा मेरी मुहब्बत का ।
ख़फ़ा दुनियां से होकर के बासिन्दा एक पाला था ।

हिफ़ाजत क्या करेगा वो जिसे ख़ुद की नही चिंता ।
मौत से कम नही निकला कि जिंदा एक पाला था ।

नफ़ासत ही मिली दिल को रही ताउम्र तन्हाई ।
दवा ऐ दर्द मे गम का पुलिंदा एक एक पाला था ।

रवां साहिल से होकर के बहाया आँख से आँसू ।
मिला तालाब पर सूखा कलिंदा एक पाला था ।

दिवाना था, सुहाना था,रूहानी थी कशिश उसकी ।
जुदा दुनियां से था रकमिश चुनिंदा एक पाला था ।। 

                       राम केश मिश्र

बुधवार, 19 अप्रैल 2017

कहानी लिखेंगे ।

            ग़ज़ल।कहानी लिखेंगे ।

चलो आज कुछ तो तुफानी लिखेगे ।
दिलों की मुकम्मल कहानी  लिखेंगें ।  

वही दर्द -ए -ग़म  वही  मुस्कराना ।
जफ़ा कम नफ़ासत पुरानी लिखेगे ।

भुलाते  गये  जो  बने  बेजुबा थे  ।
मिले याद मे  बन  रूहानी  लिखेगे । 

बड़ी कोशिशों से मिला एक मौका ।
ढरे  आँख  से  बूंद  पानी  लिखेगे ।

पढ़े ये  ज़माना  सुने  ये  फिजायें ।
वफा बावफ़ा तक ज़ुबानी लिखेंगे ।

मिला इश्क़ मे हौसला है सभी को ।
लुटी  प्यार मे ए जवानी लिखेंगे । ।

                               ©राम केश मिश्र

बुधवार, 22 मार्च 2017

ग़ज़ल।अब तो हर तरफ तन्हाइयां नजर आती है ।

अब तो हर तरफ तन्हाइयां नजर आती हैं ।।
हर चाहत मे ,दिल मे रूस्वाइयां नजर आती हैं ।।1।।

मुर्झा गयी हर रौनक सूखे पत्तो की तरह ।।
हर रौनक मे भी परछाइयां  नजर आती हैं ।।2।।

मददिम हो गयी उनकी बेसव्रिया जब से ।।
तब से उनकी हरकतो मे बेहयाइया नज़र आती हैं।।3।।

फासले तो मिट गये पर शिकवा नही ।।
नजदीकियो मे भी जुदाइया नजर आती हैं ।।4।।

एहसास होता हैं उन्हें भी मेरे न होने का ।।
और जब होता हू तो अगड़ाइयां नज़र आती हैं ।।5।।

हर कोई बेखौफ हैं प्यार मे यहां पर ।।
फिर भी क्यों दिलो में सिसकारियां नजर आती हैं ।।6।।

हर शख्स का चेहरा हैं उतरा उतरा यहां ।।
हर किसी के दिल मे खामियां नज़र आती हैं ।।7।।।

हर रोज उनकी चाहत पर उठता हैं सवाल ।।
हर दिन उनकी अदा में नादानियाँ नज़र आती हैं ।।8।।

बड़ी उम्मीद थी उनसे प्यार निभ पाने की ।।
अब तो दोस्ती मे भी परेशानियां नज़र आती हैं ।।9।।

और कुछ भी नहीं हैं उनके दिल लगाने मे ।।
अब तो उनके आहट मे भी बदनामियाँ नज़र आती हैं ।।10।।

   --------Ram Kesh Miahra
।।

ग़ज़ल।रूठे हुये दिन हैं हर शाम बड़ी मुश्किल है ।


रूठे हुये दिन हैं हर शाम बड़ी मुश्किल है  ।।ं
तेरे दीदार के लिये इन्तजाम बड़ी मुश्किल हैं ।।1।।

वो सामने से निकलते हम छुप छुप के तड़पते हैं।
कहीं हो न जायें नाम बदनाम बड़ी मुश्किल हैं ।।2।।

दिल का चैन करार छीन लिया नजरों से ।
अभी पूंछते हैं बेवफाई का दाम बड़ी मुश्किल हैं ।।3।।

तीरेनजर से मेरे जख्मी हुआ उनका दिल ।
सर किसके जायें ए इल्जाम बड़ी मुश्किल हैं ।।4।।

अभी तो उनसे मिलना अभी तो बात करना हैं ।
अभी तो दिल मे रखना तमाम बड़ी मुश्किल हैं ।।5।।

न हमवफा हमारे न हमजिगर तुम्हारे हैं ।

कैस आये घर पर सरेआम बड़ी मुश्किल हैं ।।6।।

दिल के मेरे दोस्त तुम हो इतने दूर क्यों ।
पता नहीं कब क्या हो अन्जाम बड़ी मुश्किल हैं ।।7।।

बड़ी इन्तज़ारी के बाद कभी कभी मिलते हैं ।
अधूरा हैं 'आकाश' अरमान बड़ी मुश्किल हैं ।।8।।

हर साल मना लेते हैं नये वर्ष पर खुशियां वे।
जैसे करते हैं मुझपर एहसान बड़ी मुश्किल हैं।।9।।

हर साल मनाते हैं हरहाल मना लेने दो ।
यही हाल था दिल का परसाल बड़ी मुश्किल हैं ।।10।।

            -- -- Ram Kesh Mishra

शुक्रवार, 17 मार्च 2017

ग़ज़ल। हौसले मेरी जिंदगी के ।

    ग़ज़ल।हौसलें मेरी जिंदगी के।।

हौसलें मेरी ज़िंदगी के थे नही कमजोर इतने ।।
छा गये आंखों में आँसू आज क्यूँ घनघोर इतने ।। 

ऐ खुदा तू बुत बना बैठा है आख़िर आज क्यों ।
मैं लगा हारा हूं जबकि दम वफ़ा ऐ जोर इतने ।।

लुट गया मै दोस्ती से अब भरोसा उठ चला है ।
हो गये है हमवफ़ा ही हमसफ़र में चोर इतने ।। 

हक़ नही उनका है मुझपर अब मुहब्बत न रही ।
आरजू सब मिट गयी दिल गये झकझोर इतने ।।

ऱख दिया नाज़ुक से दिल को पत्थरों के बीच में ।
जर्रा जर्रा तक मिला न वार थे पुरज़ोर इतने ।। 

ख़ौफ़ दिल को था नही मौत से टकरा गया मै ।
उम्रभर फिसला ग़मो में दर्द के थे छोर इतने ।।  

ख़ून रकमिश बह चला है दोस्ती में दिल्लगी में ।
अश्क़ आँखों में हमारे रह गये अब थोर इतने ।।

                                 ©राम केश मिश्र

गुरुवार, 9 मार्च 2017

ग़ज़ल फ़िक्र में बर्बाद मैं तेरे।

                     ।।फिक्र।।

हो गया हूँ फ़िक्र से बर्बाद मैं तेरे ।।
नाम भी आया नही फरियाद में तेरे ।।1।।

अब दिलो के टूटने से दर्द क्या होगा ।।
जो मिला है अचानक बात में तेरे।।2।।

फर्क न पड़ता अगर तुम साथ न होते ।।
रूह भी कपने लगी अब याद से तेरे ।।3।।

दिल को रौंदा है नही पर टूटता जा रहा ।।
अब नयापन आ गया अनुबाद में तेरे ।।4।।

मिट गया होता कभी का फक्र से बेदम ।।
हू अभी जिन्दा उसी  सौगात में तेरे ।।5।।

कर यकी न रह सकोगे अकेले तुम ।।
साथ होंगे सब बड़ी तादात में तेरे ।।6।।

न रहूँ मै न सही पर तुम रहोगे खुश ।।
क्या करु मै बेवजह बारात में तेरे ।।7।।

इल्म होता है नही अब ख़ुदा व खुद पे।।
गम रहेगा अश्क को बरसात में तेरे ।।8।।

                         ***

ग़ज़ल।उन्हें मेरे प्यार की कीमत लगा लेने दो ।


उन्हें मेरे प्यार की कीमत लगा लेने दो  ।।
नये साल की हर खुशियाँ मना लेने दो ।।1//

इक जख्म सा होगा थोड़ी तखलीफ सी होगी ।
पर उन्हें मेरी हालात पर मुस्कुरा लेने दो ।।2//

एतबारी का सिलसिला तो मिट जायेगा कम से कम ।
मेरे नाम से नाउम्मीदी  का दीपक जला लेने ।।3//

बड़े दिन बाद अब तरसेगी मेरी आंखें ।
और उन्हें गैरो से आंखे तो मिला लेने दो ।।4//

उफ तक न करेगे इस तन्हा जिन्दगी से ।
गम के आंसुओ को आंखों मे जला लेने दो ।।5//

जब किस्मत ने ही आजमाया है मेरे दिल को ।।
तो उन्हें भी अपनी हसरत मिटा लेने दो ।।6//

मुझे उम्मीद है अपनी यादे न मिटा पायेगी ।
मेरी यादे चाहे छिपाना तो छिपा लेने दो ।।7//

मेरे दोस्तों ,मुझे यकीन हैं उनकी खुदगर्जी पर ।
अदा उनकी हैं चाहे तो दिखा लेने दो ।।8//

इस वर्ष उनके लिये मागेंगे दुआएँ रब से ।
भले ही मेरे लिये बद्दुआ मना लेने दो ।।9//

ऐ मेरे रहनुमा, मेरी चाहत अजीज दोस्तों ।
आज तो लम्हा लम्हा उनकी यादों मे गवा लेने दो ।।10!!

          ------Ram Kesh Mishra

ग़ज़ल।किस्ती का किनारा समझ बैठा मैं।

पहली नजर को सितारा समझ बैठा मै ।
तुम्हें अपनी किश्ती का किनारा समझ बैठा मै ।।1//

कल भी धोखा पाया था आपकी नज़र में ।
आज भी आपको सहारा समझ बैठा मै ।।2//

हर इम्तिहान पर लगा दी जान की बाजी ।/
तुम्हारे हर जख्म को नजारा समझ बैठा मै ।3//

हर इक नज़र के जख्म को दिखाता किसको ।
खुद को मौत का हारा समझ बैठा मै ।।4//

खुदा जाने मेरी बेपनाह मुहब्ब्त को ।
खुद को मुहब्ब्त का मारा समझ बैठा मै ।।5//

तुम्हारी आरजू को अपना तो लिया मैंने ।
जबकि खुद को बेगाना समझ बैठा मै ।।6//

सूरज सी रोशनी है तुम्हारी अदाओ मे ।
अपने ख्वाबो मे तुम्हें तारा समझ बैठा मै ।।7//

जबकि उठाई है उँगलिया तुमनें जबानें की तरफ ।।
अपनी मुहब्ब्त का इशारा समझ बैठा मै ।।8//

शिकवा नहीं हैं तुम्हारी मुहब्ब्त से "आकाश" ।।
अपने ही दिल को आवारा समझ बैठा मै ।।9//

           Ram Kesh Mishra
           Bhadaiyan,Sultanpur
    

नशा ए इश्क

ग़ज़ल   नशा ए इश्क अब छोड़ा न जाए ।  जमाने से मगर उलझा न जाए ।   बड़ी मासूम हैं उसकी अदाएं,   कि मुझसे और अब देखा न जाए ।   गरीबों ...