पहली नजर को सितारा समझ बैठा मै ।
तुम्हें अपनी किश्ती का किनारा समझ बैठा मै ।।1//
कल भी धोखा पाया था आपकी नज़र में ।
आज भी आपको सहारा समझ बैठा मै ।।2//
हर इम्तिहान पर लगा दी जान की बाजी ।/
तुम्हारे हर जख्म को नजारा समझ बैठा मै ।3//
हर इक नज़र के जख्म को दिखाता किसको ।
खुद को मौत का हारा समझ बैठा मै ।।4//
खुदा जाने मेरी बेपनाह मुहब्ब्त को ।
खुद को मुहब्ब्त का मारा समझ बैठा मै ।।5//
तुम्हारी आरजू को अपना तो लिया मैंने ।
जबकि खुद को बेगाना समझ बैठा मै ।।6//
सूरज सी रोशनी है तुम्हारी अदाओ मे ।
अपने ख्वाबो मे तुम्हें तारा समझ बैठा मै ।।7//
जबकि उठाई है उँगलिया तुमनें जबानें की तरफ ।।
अपनी मुहब्ब्त का इशारा समझ बैठा मै ।।8//
शिकवा नहीं हैं तुम्हारी मुहब्ब्त से "आकाश" ।।
अपने ही दिल को आवारा समझ बैठा मै ।।9//
Ram Kesh Mishra
Bhadaiyan,Sultanpur