रविवार, 12 फ़रवरी 2017

ग़ज़ल।बस बेवफ़ाई प्यार में।


      ग़ज़ल।। बस बेवफ़ाई प्यार में ।

मुश्किलों से मिल यहां पाती रिहाई प्यार में ।
दे रहे सब रहगुज़र मसलन दुहाई प्यार में ।।

जो कभी नाकाम थे मंजिले उनको मिली न ।
आज बेशक़ कर रहे है रहनुमाई प्यार में ।।

ह्मवफ़ा सब हो गये इश्क़ के मारे मुवक्किल । 
जल रहे है आज़कल बन रोशनाई प्यार में ।। 

साहिलों पर आज बर्पी हैं निरा ख़ामोशियां ।
कौन देता अब फिरे दर दर गवाही प्यार में । ।

इश्क़ के झांसो मे फँसकर दाँव पर है जिंदगी ।
मौत से बेहतर भली बेशक़ जुदाई प्यार में ।।

हो गया मुझको यकीं इल्म उनको हो न हो ।।
लम्हा लम्हा ग़मसुदा क़ीमत चुकाई प्यार में ।।

मंजिले उनके नसीबों में लिखी थी मिल गयी ।
या ख़ुदा मुझको मिली बस बेवफ़ाई प्यार में ।।

आरजू है ख़ाख रकमिश गर्दिशे थी उम्रभर ।
जख़्म ख़ाकर ज़िन्दगी मैंने लुटाई प्यार में ।।

                         © राम केश मिश्र

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