।।गज़ल।।आराम नही आया तो।।
वर्षो बाद भी किसी का पैगाम नही आया तो।।
बड़ी तक़लीफ़ हुई मेरा नाम नही आया तो ।।
ख़ैर! कोई बात नही ये तो उनकी मर्जी है ।।
कोई खत मेरा भी बेनाम नही आया तो ।।
ये मेरी आँखों के आंशू अगर पानी थे ।।
फिर कैसे हो गया बदनाम नही आया तो ।।
निख़ालिश मिट गया मैं भी तुम्हारे प्यार के ख़ातिर ।।
तोड़ दी हर कस्मे इक शाम नही आया तो ।।
तेरी बेहयाई से तो कोई गिला न था मुझे ।।
पर तोड़ दिये दिल भी आराम नही आया तो ।।
R.K.M