बुधवार, 19 नवंबर 2014

।।एक दिन ।।

।। एक दिन।। एक दिन तुम और हम चुप थे तभी तुम चले गये ।। 1 मैं तो रुका था दो पल नाउम्मीद तारे भी चले गये ।। 2 बस मे तब थे आंसू अपने बाद जा ने से चले गये ।।3।।

मंगलवार, 18 नवंबर 2014

।। उन्हें डर था ।।

           ।। उन्हें डर था ।।


उन्हें डर था  और मुझे भी ।
वे मुझसे डरते थे ,
मै खुद से डरता था ।। 1।।


कहीं वे खो न जायें आखो में ।।
औऱ मुझे मेरी ही ,
खबर न थी । 2।।


कुछ दिन परवाह किया मैने ।
और वो भी अब ,
वेपरवाह हो गए।। 3।।


हद हो गयी तब मेरे उम्मीद की ।
जब मुस्कुरा दिये ,
किसी गैर के होकर ।।4।।

शनिवार, 5 जुलाई 2014

वक्त और हिसाब


          गजल(वक्त और हिसाब)

वक्त भी कितना लाजवाब होता हैं .।।
किसी का दर्द तो किसी का ख्वाब होता हैं .। 


लाख गुनाहों से कर ले कोई पर्दा यहाँ ।।
इक न इक दिन वह बेनकाब होता ।।

अमन किसे मिलता हैं छीनकर गैरो की खुशियाँ ।।
जब अपने ही दिल से जबाब होता है ।।

तखलीफ़ तो होती ही है प्यार में ऐ दोस्त ।।  
मौसम तो हर वक्त लाजवाब होता हैं ।। 


फिक्र मतकर उनकी बेवफाई की ऐ दोस्त ।। 
वक्त आने पर पल पल का हिसाब होता हैं ।।

रविवार, 29 जून 2014

लत

              ।।गज़ल(लत)।।

लोग तो कहते हैं बड़ी बेकार की लत हैं ।। 
बड़ी मुश्किल है मुझे उनके प्यार की लत हैं ।। 1।। 

सुना है लत से हालत खराब होती हैं ।। 
फिर भी उनकी अदा पर इजहार की लत हैं ।।2।।

शिकायत उनकी कि हम पास नही आते ।। 
जबकि हर पल उन्हीं के इन्तजार की लत है ।।3।। 

तखलीफ़ मुझे भी है उनकी जुदाई का ।।
उन्हे भी मेरे प्यार पर ऐतबार की लत हैं ।।4।। 


तकदीर मे होगा तो मुमकिन होगा मिलन ।। 
अभी तो मेरे अश्कजार की लत हैं ।।5।। 
 

                      ***

गुरुवार, 26 जून 2014

गज़ल(एक तन्हा)

         ।।गज़ल(एक तन्हा) ।। 

हम तो कहते हैं हालात एक तन्हा है ।।  
इत्तफाको से मुलाकात एक तन्हा हैं ।।  1।। 

वक्त पर आये तो हैं वक्त की कीमत ।।
वेवक्त वक्त की तादात एक तन्हा है ।।  2।। 

जब विछडना ही है मुकद्दर मे मेरे लिखा ।। 
फिर तो जुदाई की हर बात एक तन्हा है ।। 3।। 

शिकायत क्यो कर तकदीर से अपने ।। 
इसकी तो हर वारदात एक तन्हा हैं ।। 4।। 

फिक्र मत कर दोस्त लौट कर फिर  आयेगे ।। 
आँखों से हुई हर बरसात एक तन्हा है ।।5।। 

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शनिवार, 14 जून 2014

।।गुनाह।।

               ।।  गुनाह।।

सिर्फ होठों पर मुस्कुराहट नही देखी जाती ।।
वक्त अपना हो तो राहत नही देखी जाती ।।1।।

जो दूर है यकीनन साथ न निभा पायेगे।।
उसके पास आने की आहट नही देखी जाती ।।2।। 

भले ही तुम उसे प्यार करते हो दिल से ।। 
पर बेकसी, बेबसी मे चाहत नही देखी जाती ।। 3।। 

ए दोस्त मत कर  गुनाह हमवफा बनने का ।।
हमवफा की छटपटाहट मुझसे नही देखी जाती ।।4।। 

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गुरुवार, 12 जून 2014

तन्हा

                ।।तन्हा।।
    

जब किसी का तन्हा बहुत करीब होता हैं ।।
तो वह पल भी कितना अजीब होता हैं ।।1।।

बदल जाती है उम्र भर की रौनक गम मे।। 
और एहसास भी काफ़ी कुछ गरीब होता है ।।2।। 

होने को तो होतीं हैं तनहाइयाँ उनके साथ ।।
पर मंजर हर हस्र का बेतरकीब होता है ।।3।। 

फिक्र न कर ऐ मेरे दोस्त इस दर्द की ।।
ये लम्हा किसी-किसी को ही नसीब होता हैं ।।4।। 

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मंगलवार, 10 जून 2014

।।सबब।।

                 ।।सबब।।

किसी आदमी को दिल-ए-दर्द जब होता हैं ।।
वही उसकी जिंदगी का सक्त  सबब होता है ।।1।।

सबक तो सीखते हैं हम ताउम्र तजुर्बे से ।। 
खुदगर्ज़ जिंदगी मे सही वक्त कब होता हैं ।। 2।। 

हम खुद को छोड़ करके ही तहकीक करते है ।।
न जाने गैरों मे क्यों इतना तलब होता हैं ।। 3।।

हमवफाओ की तो यहाँ परवाह नहीं जर से ।। 
हमदम, हमसफ़र का अब कहां अदब होता है ।।4।।  

पक्के है जिनके वादें, है आहों पे जिनकी मन्नत ।। 
इबादत है जिनकी असली उन्हीं का रब होता हैं ।।5।।

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शनिवार, 7 जून 2014

गर्म के मारे


                  ।।गर्म के मारे।।

ये दिल घायल हो गया जब गर्म के मारे ।। 
तरबतर तब हो गया मै शर्म के मारे ।।1।।

                                                                 
हद हो गयी जब मैंने अपना शर्ट निकाला ।। 
हैरान हैं सब लोग अपने मर्म के मारे ।।2।।

पानी पानी हो गया हर बूंद टपकने लगी ।। 
तब धूप शर्माने लगी निज कर्म के मारे ।।3।।

हर शाँप मे देखा, हर हर ढाबे मे ढूंढा ।।
फिर भी प्यास अधूरी रही इक टर्म के मारे ।।4।।

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बुधवार, 4 जून 2014

अंजाम-2

                  अंजाम

ए मेरे दोस्त! अंजाम की परवाह न कर ।।
वक्त आयेगा इंसाफ का गुनाह न कर ।। 1।।

और भी हैं यहाँ हालात के मारे मुसाफ़िर ।।
सिर्फ अपनी ख्वाहिशों को ही आगाह न कर ।।2।।

मन्नतो से बदल जाती है तकदीर यहाँ ।
बेमुरौवत से किसी पर निगाह न कर ।। 3।। 

गमो का आगाज़ न कर दिल के आशियाने मे ।।
किसी और के लिये भी गमो की चाह न। कर ।।4 ।। 

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नशा ए इश्क

ग़ज़ल   नशा ए इश्क अब छोड़ा न जाए ।  जमाने से मगर उलझा न जाए ।   बड़ी मासूम हैं उसकी अदाएं,   कि मुझसे और अब देखा न जाए ।   गरीबों ...