शनिवार, 15 फ़रवरी 2014

*आरज़ू*


लोग कहते हैं कि जिंदगी सवर जाती हैं ,
कोई मिल जायें तो जिँदगी गुजर जाती हैं
ऐ मेरे दोस्त कोई न मिले किसी से ,
वरना जीने की आरजू बिखर जाती हैं ,

                      ***

उन्हें प्यार करो और एतराज न हो ,
उनका इंतज़ार करो एतराज न हो ,
ऐ दोस्त गम मिले तो मिले मुझको ,
वे खुशियों की बौछार करें एतराज न हो ,

                      ***

हर सीने मे दिल धड़कने वाले हैं ,
हर चाहत मे लोग तडपने वाले है  ,
अधूरी रह जाती हैं आरज़ू ऐ दोस्त ,
मिलकर भी लोग बिछड़ने वाले हैं ,

                    ***
                   

*आरज़ू*


लोग कहते हैं कि जिंदगी सवर जाती हैं ,
कोई मिल जायें तो जिँदगी गुजर जाती हैं
ऐ मेरे दोस्त कोई न मिले किसी से ,
वरना जीने की आरजू बिखर जाती हैं ,

                      ***

उन्हें प्यार करो और एतराज न हो ,
उनका इंतज़ार करो एतराज न हो ,
ऐ दोस्त गम मिले तो मिले मुझको ,
वे खुशियों की बौछार करें एतराज न हो ,

                      ***

हर सीने मे दिल धड़कने वाले हैं ,
हर चाहत मे लोग तडपने वाले है  ,
अधूरी रह जाती हैं आरज़ू ऐ दोस्त ,
मिलकर भी लोग बिछड़ने वाले हैं ,

                    ***
                   

सोमवार, 10 फ़रवरी 2014

*शायरी-2*


                ***
दिल और दिल की बात  न कर ।
हर किसी से मुलाकात न कर ।
बेशक तन्हा ही है  तुम्हारे हिस्से मे ।
बेवजह आँशुओ को बर्बाद न कर ।

                   ****

बड़ी उम्मीद थी तेरे प्यार से मुझको ।
बड़ा प्यार था तेरी माशूमियत पर ।।
तोड़ दिया दिल मेरा तुमने आज ।
तरस आता हैं मुझे मेरी माशूमियत पर ।।

शनिवार, 8 फ़रवरी 2014

*शायरी -1*


हजारों बार गिरा हैं गुलदस्ता गुलदान से बाहर ।
करे क्या माली हवायें आ ही जाती हैं ।।

                     ***

गुजार देते हम भी तुम्हारे साथ कुछ पल ।
करे क्या जबाना मिलने नहीं देता ।।

                      ***
मिलेंगी वादियों मे मेरे आने की आहट ।
जरा गौर से सुनियेगा आवाज़ मद्दिम होगी ।।

                       ***

मजबूर दिल को बेदर्द मत समझना ।
दर्द होता हैं मगर कोई समझता नहीं ।।

                        ***

दिल को तसल्ली देता हूँ कि बरसेगा कभी सावन ।
पर बरसों गुजर गये सावने इन्तज़ार मे ।।

प्यार

वक्त ही काफ़ी नहीं इंतजार के लिए ।
लब्ज़ ही काफी नहीं इजहार के लिए ।
जिंदगी भी कम पड़ जाती हैं दोस्तो ,
सिर्फ दिल ही काफ़ी नहीं हैं प्यार के लिए ।।


vaqt hi kafi nhi intjar k liye .
lafj hi kafi nhi ijhar k liye .
jindgi bhi kam pad jati hai dosto,,
sirf dil hi kafi nhi hai pyar k liye ..




नशा ए इश्क

ग़ज़ल   नशा ए इश्क अब छोड़ा न जाए ।  जमाने से मगर उलझा न जाए ।   बड़ी मासूम हैं उसकी अदाएं,   कि मुझसे और अब देखा न जाए ।   गरीबों ...