।शेर।तस्वीर तक नही आती।
न मुद्दत है न आशा है न शिकवा है न रंजोगम ।
मगर है याद की दुनिया बड़ा खुशहाल रहता हूँ ।।
किसी ने तो समझा मुझे नादान के काबिल ।।
साहिलों पर तो लोग मुझे पथ्थर दिल समझते है ।।
सभी को दर्द मिलता है यही दरतूर दुनिया का ।
मिले हर गम से वाक़िब हूँ नादाँ न समझना तुम ।।
मिलेगा वक्त का मरहम मिलेगे वक्त के साथी ।
यहा जो वक्त का मारा उसे उसे कुछ भी नही मिलता ।।
बेवफाओ की महफ़िल से निकलकर आ न पाये जो
उसे कैसे पता होगा वफ़ा का भी वजूद होता है ।
ख्वाब आते है और वो ख्वाबो में ही जिये जाते है ।
हकीकत में तो उनकी तस्वीर तक नही आती ।
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