सोमवार, 9 मार्च 2015

।।गजल।।गम से निकाह न कर।।

    ।।गजल।।गम से निकाह न कर।।

प्यार कर पर प्यार मे जिंदगी तबाह न कर ।।
कम से कम हर किसी पर सक की निगाह न कर ।। 


और भी तो है मायने इस जिंदगी के  दोस्त ।।
सिर्फ प्यार के ही लिये हर गुनाह न कर ।।2।। 


प्यार में रास्तो की कोई शरहद नही होती ।।
जिंदगी भर शाहिलो पर ही निबाह न कर ।।3।।


और भी रिश्ते है तेरे ही इंतजार में माहिल ।।
मायूस न कर इनको, गम में पनाह न कर।।4।।


यकी कर तुम्हे भी  जरूरत है जिंदगी में इनकी ।।
अभी भी वक्त है गम से निकाह न कर ।।5।।

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शनिवार, 7 मार्च 2015

।।गजल।।प्यार की ख्याहिस न थी।।

    ।।गजल।।प्यार की ख्वाहिस न थी।।


ऐ दोस्त मुझे तेरे प्यार की ख्वाहिस न थी ।। 
ये तेरा ही कहर था मेरी आजमाइस न थी ।।1।। 


तब तुम तोड़कर दोस्ती भी चले गये मेरी ।।
जब तुमसे दूर रहने की भी गुंजाइस न थी ।।2।।


फर्क तो पड़ता ही है हालात बदल जाने से।।
पर तेरे बदल जाने की कोई फरमाइस न थी ।। 3।।


कल ही लौट कर चला आया तेरे शहर से मैं ।।
तेरी तस्वीर न थी अदाओ की नुमाइस न थी ।।4 ।।


बस दिल जीत लिया था तेरा रूठना मनाना ।।
वरना इस दिल की कोई पैमाइस न थी ।।5।।

   
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।।गजल।। कसूर तू।से है।।

     ।।गजल।। कसूर तुमसे है।।



मेरी हर वफा, मेरा हर गुरूर, तुमसे है ।।
कम ही पर जो भी है सुरूर तुमसे है ।। 1।।


माना कि मै आज भी गुनेहगार हू तेरा  ।।
अनजाने में जो भी हुआ कसूर तुमसे है।।2।।


किसी की बद्दुवाओ की तवज्जो न की मैंने।।
पर इस दिल की दुआ जरुर तुमसे है ।।3।।


तुमे न हो मालूम तो सुन ले बेअसर दिल ।।
तुम्हारी चाहत में दिल मजबूर तुमसे है ।।4।। 


अब इतना भी न कर की भरोसा भी टूट जाये ।।
फासले कुछ भी नही पर दूर तुमसे है ।।5।।

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शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2015

।।गजल।।चाहत तुम्हे हित्ती जरा तो।।

   ।।गजल।।चाहत जरा होती तुम्हे तो।।



जिंदगी की शौक से राहत जरा होती तुम्हे तो ।।
दिल दिखा देता अगर चाहत जरा होती तुम्हे तो ।।1।।


मिट गया होता हमारे बीच का ये फासला ।।
गर हमारे दर्द की आहट जरा होती तुम्हे तो ।।2।।


मैं चला जाता यकीनन दूर तेरे आंशिया से ।।
पास आने से मेरे छटपटाहट जरा होती तुम्हे तो ।।3।।


मन्नतो से इश्क़ में है बदल जाते मुकद्दर ।।
दिल बदलने की चाह से फुरसत जरा होती तुम्हे तो ।। 4।।


जा कभी अब न करूँगा ख्वाहिसे इजहार की ।।
आज तन्हा रह न जाते हसरत जरा होती तुम्हे तो ।। 5।।

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गुरुवार, 26 फ़रवरी 2015

।।गजल।।शाजिसे मेरे लिए भी।।

       ।।गजल।।शाजिसे मेरे लिए भी।।


प्यार में देखा ठहर, थी रंजिसे मेरे लिये भी ।।
गम वही,तन्हा वही,थी बंदिशे मेरे लिये भी ।।1।।


आंशुओं के भाव से  बिक रहे थे दिल वहा पर ।।
हर ख़ुशी को बेचने की थी ख्वाहिसे मेरे लिये भी ।।2।।

जुर्म मेरा कुछ नही था पर सजा सब एक सी थी ।
तब हो गयी थी दर्द की फरमाइसे मेरे लिए भी ।।3।।


है वहा के लोग सब इश्क के मारे मुअक्किल ।।
लूटने की कोसिसे थी हो रही मेरे लिए भी।। 4।।


मन्नतो की वजह से बच निकल पाया वहा से ।।
बन रही थी बेमुरौवत शाजिसे मेरे लिए भी ।।5।।

                

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।।गजल।।मौत का मारा।।

        ।।गजल।।मौत का मारा।।


हर वह शक्श जो भी बेशहारा निकला ।। ।।
कोई गम में डूबा कोई वक्त का मारा  निकला ।। 1।।


वजह कुछ भी रही हो पर वफ़ा का नाम जब पूंछा ।।
कोई दर्द से बोझिल कोई वक्त का मारा निकला ।। 2।।


बात जब होने लगी प्यार की गहराइयो की ।।
याद में तन्हाइयो में हर कोई बेचारा निकला।। 3।।


अब करकने है लगा पलको पर बन एक कांटा ।।
जो दूरियों में रह कभी आँख का तारा निकला ।। 4।।


क्या करोगे तुम समझकर चाहतो की बेबसी ।।
इश्क में जो मिला मौत का मारा निकला ।।5।।

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बुधवार, 25 फ़रवरी 2015

।।गजल।।आदमी।।


         ।।गजल।।आदमी ।।


पास आकर मंजिलो पर ढह गया हर आदमी ।।
जिंदगी को खोजता ही रह गया हर आदमी ।।1।।


शौक तो सबको रही दिल में बसाने के लिए ।।
पर प्यार के ही खौफ से अब डर गया हर आदमी ।। 2।।


जब चला तो भीड़ थी काफिले में वह चला था ।।
लौट कर आया अकेला रह गया हर आदमी ।। 3।।


तब सजा मिलने लगी बेगुनाहो को यहा ।।
जब दिलो की शौक से भर गया हर आदमी ।।4।। 


खुदगर्जी की वजह से जब रूह तक बिकने लगी ।।
तब आंशुओं की बूँद सा ढह गया हर आदमी।।5।।

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रविवार, 22 फ़रवरी 2015

।।गजल।।कातिल तुझे समझ।।

     ।।गजल।। कातिल तुझे समझा।।



उम्र भर जिंदगी का शाहिल तुझे समझा ।।
शुक्र कर की दोस्त के  काबिल तुझे समझा ।। 1।।


थे और भी बेबक तबायफ मुस्कराने को ।।
दर्द औरो का था पर दिल तुझे समझा ।। 2।।

पर तोड़ दी तुमने ही देकर प्यार की खुशबू ।।
ना कि इस दिल ने बोझिल तुझे समझा ।।3।।

लोग करते तय रहे यू जिंदगी का रास्ते ।।।
छोड़कर हर रास्ता मंजिल तुझे समझा ।।4।।


जा किसी दिन याद आये तो न रोना तुम ।।
न कहूगा मैं कभी कातिल तुझे समझा ।। 5।।

                       !!!!!!!

शनिवार, 21 फ़रवरी 2015

।।गजल।।इंतजार न था।।

          ।।गजल।।इंतजार न था।।

प्यार की शौक न थी गम का इंतजार न था ।।
हर किसी को देखा पर क़िसी  को प्यार न था ।। 1।।

हर शक्श दूरियों में था बेबसी का मारा ।।।
जबकि उसे तो खुद पर ही एतबार न था ।। 2।।

हर फूल खुशनुमा था बस उम्र भर ही यारो  ।।
फिर तो ख़ुशी का उनके कोई आशार न था।। 3।।

हर तरफ बेवफाई हर और बेरुखी थी ।।
हर दिल पड़ा था खाली कोई दिलदार न था ।।

लाख कोशिशे की पर हार कर मैं आया।। 
दिल एक ही था मेरा पर कोई तैयार न था ।।5।।

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बुधवार, 18 फ़रवरी 2015

।।गुनाह।।गजल।।

            ।।गुनाह।।ग़ज़ल।।

अभी भी वक्त है वक्त की परवाह कर  ले ।।
अब मंजिलो के लिए खुद को आगाह कर ले ।।

पलक  झपकेगी तो मिटा देगे हस्ती तेरी ।।
बेनकाबी से पहले पैनी निगाह कर ले ।।2 ।।।

पैमाइशो के दौर में दिल की कीमत नही देखी जाती ।।
दोस्त न सही तो दुश्मनो से ही निबाह कर ले ।।3।।।

ऐ दोस्त अब मासूमियत का जमाना न रहा ।।
रास्ते जिंदगी में खुदगर्जी निकाह कर ले ।।4।।

टूट जायेगा दिल यकीनन ठोकरों से यहाँ ।।
अभी भी वक्त है कुछ तो गुनाह कर ले ।।5।।

                    ××××

नशा ए इश्क

ग़ज़ल   नशा ए इश्क अब छोड़ा न जाए ।  जमाने से मगर उलझा न जाए ।   बड़ी मासूम हैं उसकी अदाएं,   कि मुझसे और अब देखा न जाए ।   गरीबों ...