सोमवार, 29 जून 2015

।।गजल।।इंतजार में कोई ।।

     ।।गजल।। मजबूर है कोई ।।

तेरी खुशियो के लिये ही दूर है कोई ।।
ये दोस्त तेरी दोस्ती में मजबूर है कोई ।।

और भी वजह थी तुमसे दूर जाने की ।।
पर तेरी बेखुदी में मगरूर कोई है ।।

क़द्र करता हूँ तुम्हारी शौक की हमदम ।।
बस तुम्हारी गम में खुद चूर है कोई ।।

सबूत माग सकते हो तुम मेरी बेगुनाही का ।।
पर यकीनन तेरे प्यार में बेकसूर है कोई ।।

दर्द है या है तेरे इंतकाम का मंजर ।।
या तेरी बेवफाई का नया दस्तूर है कोई ।।

                        .........   R.K.M

रविवार, 28 जून 2015

।।गजल।।कह न पाया हूँ।।

     ।।गज़ल।।कह न पाया हू।।

तेरी यादो से हटकर मैं कभी भी रह न पाया हू।।
बड़ी तकलीफ है मुझको हकीकत कह न  पाया हूँ ।।

हर बार रुक गयी है लबो तक बात आकर के ।।
तेरी दूरिओ के गम कभी मैं सह न पाया हूँ ।।

न मौका था न मुद्दत थी न तेरी रहनुमायी थी।।
बनकर आँख का आँशु तेरे मैं ढह न पाया हूँ।।

न तुमने न कहा मुझसे न मैं भी हा समझ पाया ।।
दरिया पास था मेरे मगर मै बह न पाया हूँ ।। 

खुले है दिल के दरवाजे यकीनन आप के खातिर।।
क्योकि तुझे भूलने की कोई वजह न पाया हूँ ।।

       
                   R.K.M

शनिवार, 27 जून 2015

।।इंतजार मिला तेरा।।

        ।।ईंतजार मिला तेरा ।।

प्यार में एक गम भरा इंतजार मिला तेरा ।।
टूट गया दिल जब दीदार मिला तेरा ।।

बेवफाई की तो दहलीज पार  कर दी तुमने ।।
हर वक्त पर सिर्फ इनकार मिला तेरा ।।

फिर भी कोशिशो से दिल हार नही माना ।।
जान थी पर रूह ही बेजार मिला तेरा ।।

उस दिन आयी थी जब तुम गैर के शाये में ।।

तब ही हकीकत में निखार मिला तेरा ।।

बाकी मैंनेँ भी दुआएँ मांगी थी तेरे खुशियो की ।।
पर बद्दुआओ का असर हर बार मिला तेरा ।। 

                  R K M

शुक्रवार, 26 जून 2015

।।गज़ल।।आराम नही आया तो।।

   ।।गज़ल।।आराम नही आया तो।।


वर्षो बाद भी किसी का पैगाम नही आया तो।।
बड़ी तक़लीफ़ हुई मेरा नाम नही आया तो ।।

ख़ैर! कोई बात नही ये तो उनकी मर्जी है ।।
कोई खत मेरा भी बेनाम नही आया तो ।।

ये मेरी आँखों के आंशू अगर पानी थे ।।
फिर कैसे हो गया बदनाम नही आया तो ।।

निख़ालिश मिट गया मैं भी तुम्हारे प्यार के ख़ातिर ।।
तोड़ दी हर कस्मे इक शाम नही आया तो ।।

तेरी बेहयाई से तो कोई गिला न था मुझे ।।
पर तोड़ दिये दिल भी आराम नही आया तो ।। 

                     R.K.M

मंगलवार, 16 जून 2015

।।प्यार किया करता था।।

    ।।प्यार किया करता था।।

दर बदर तेरा दीदार किया करता था ।।
कुछ भी हो तुमसे मैं प्यार किया करता था ।।

हर रोज वादा करके तुम कभी नही आये ।।
ये जानकर भी तेरा इंतजार किया करता था ।।

तुम बेफिक्र थे इसकी परवाह न थी मुझको ।।
मैं तो तेरे फ़िक्र में अश्कजार किया करता था ।।

मैं वक्त का था मारा तू वक्त की थी मंजिल ।।
हर वक्त तेरे दर पर गुजार दिया करता था ।।

जब तेरे मिलने के भी आसार खत्म होने थे । ।
टूट गया दिल पर बेकरार हुआ करता था ।।

अब तो तेरे जलवे का गुजरा जमाना हो गया ।।
पर आज भी तुम पर कोई ऐतबार किया करता था।।

    
                R.K.M

गुरुवार, 14 मई 2015

।।गजल।।दूर के रिश्ते थे ।।

     ।।गजल।।दूर के रिश्ते थे।।

प्यार था पर प्यार में दूर के रिश्ते थे ।।
तुम पर ऐतबार था पर दूर के रिश्ते थे ।।

वक्त मेरे पास भी कम था और तेरे पास भी ।।
दिल ही गुनेहगार था कि दूर के रिश्ते थे ।। 

तू मिलना चाहती थी हर फासलों पर मुझसे ।।
और मैं भी बेकरार था कि दूर के रिश्ते थे ।।

वजह तुमने छिपाया क्यों हमारे प्यार केखातिर।।
बहाना तो हजार था कि दूर के रिश्ते थे ।।

यकीनन मैं कभी भी न तुमसे रूठ पाया था।।
खत्म हो ही गया इंतजार कि दूर के रिश्ते थे ।।

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मंगलवार, 5 मई 2015

शायरी

�� न वफ़ा न गम न प्यार का गुलाम होता है ।।
न याद न दर्द न इंतजार का गुलाम होता है ।।
ऐ मेरे दोस्तों यें वसूल है जिंदगी का कि ।।
आदमी वक्त और हालात का गुलाम होता है ।।
                 ������

�� हालात बदल गये तो जज़्बात का डर है ।।
��इरादे बदल गये तो मुलाकात का डर है ।।
��न मिले कभी कोई फर्क नही दोस्तों ।।
��मिल के न मिले इस बात का डर है ।।

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मंगलवार, 17 मार्च 2015

।।गजल।।।।आरजू ही बिखर गयी।।

    ।।गजल।।आरजू ही बिखर गयी ।।


हर चाहत की रौनक, हर आरजू बिखर गयी ।।
तेरे जाने से मेरी दुनिया ही उजड़ गयी ।।1।। 


पढ़ता तो हूँ तेरे खत की हर लाइनें हरदम ।।
तेरी तस्वीर पढ़ते पढ़ते से मेरी नज़रे सुधर गयी ।।2।।।


तू न समझे कोई बात नही तेरे ही कहर का मतलब ।।
पर इसके ही असर से मेरी हसरत ही बिखर गयी ।।3।।


आखिर इंतजार का भी वक्त होता है ऐ दोस्त ।।
न जाने तब से कितनी तन्हाई गुजर गयी ।।4।।


रोक तो लेता ही मैं अपने बेगुनाह आशुओ को ।।
पर तेरी तलाश में खुद व् खुद निकर गयी ।।5।।

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गुरुवार, 12 मार्च 2015

।।गजल।।बादशाह हूँ मैं।।

        ।।गजल।।बादशाह हूँ मैं ।।



तेरा दरिया तेरी मंजिल तेरी पनाह हूँ मैं ।।
तेरी वफ़ा तेरी अदा का  तलबगार हूँ मैं ।।

बिखर गया हूँ आकर तेरे आगोश के शाये में ।।
तेरी  इस बेबस कशिश का गवाह हूँ मै ।।2।।


तेरे ख्वाबो की मंजिल से लौट कर आया हूँ  ।। 
तेरा साथी तेरा हमदम तेरा आगाह हूँ मैं ।।3।।


तू कुछ भी नही है मेरी जन्नत के सिवा हमदिल ।।
तेरे लब्जो की सजा तेरी निगाह हूँ मै ।।4।। 


लोग तो जलते है मेरी इन वफाओ से दोस्त ।।
क्योंकि जानते है तेरे हुस्न का बादशाह हूँ मै।। 5।।

                          ***

।।गजल।।खुद को गवां बैठा हूँ।।

      ।।गजल।।खुद को गवां बैठा हूँ ।।




मैं कब से उनके चेहरे पर नजरें गड़ा बैठा हूँ ।।
वे तो खामोश है मैं खुद को भुला बैठा हूँ ।।1।।


यकीन उनको भी है उनकी रहनुमाई का ।।
मैं भी उनकी याद में पलके झुका बैठा हूँ।।2।।



शुक्रिया अदा करता हूँ उनकी हर मुस्कराहट का।।
उनके रुख्शत पर हर एक शै लुटा बैठा हूँ ।।3।।


शहम जाता हूँ उनके करीब से गुजरने पर ।।
मग़र दूरियों में उनकी ही तस्वीर छिपा बैठा हूँ ।।


कल ही उसने पूंछा कितनी मुहब्बत है तुमको ।।
कैसे कह दू उनकी अदाओ में खुद को गवां बैठा हूँ ।5।।

                      ***

नशा ए इश्क

ग़ज़ल   नशा ए इश्क अब छोड़ा न जाए ।  जमाने से मगर उलझा न जाए ।   बड़ी मासूम हैं उसकी अदाएं,   कि मुझसे और अब देखा न जाए ।   गरीबों ...