शुक्रवार, 18 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।दिल को जलाने के लिये।।

��।।ग़ज़ल।।इस दिल को जलाने के लिये ।।��

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भरोसा तो चाहिये दोस्त मुहब्बत निभाने के लिये ।।
दिल पर पथ्थर भी रख लेंगे आजमाने के लिये ।।
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सिर्फ नज़रो के इशारों की हम तवज्जो नही करते ।।
कोई भी मिल जायेगा यहा मुस्कराने के लिये ।।
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हर बार की तरह तुम भी कुरेद जावोगे मेरे दिल को ।।
तब गम भी नही बच पायेगा गवाने के लिये ।। 
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मेरे दिल टूटने के किस्से इतने हमआम हो गये है कि
अब महफिले भी नही मिलती दर्द छुपाने के लिये ।। 
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हर बार धोखा ही पाया है अदाओ पर इल्म करके ।।
अदायें तो होती ही है बस दिखाने के लिये ।।
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गर्दिशों के दौर से गुजर आया हूँ ये मेरे दोस्त ।।
बेवज़ह वक्त बर्बाद न कर मुझे लुभाने के लिये ।।
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अब इन आँखों में प्यार की तस्वीरें नही बनती है ।।
तुम होगी कोई हशीना इस जमाने के लिये ।। 
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जा कल पूछ कर आना अपने दिल से तन्हाइयो में ।।
वरना आना ही मत इस दिल को जलाने के लिये ।।

           ✏✏✏.R.K.M

बुधवार, 16 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।दिल मज़बूर हो गया है।।

  ।।ग़ज़ल।।दिल मजबूर हो गया है ।।

हर चेहरा किसी के प्यार में नूर हो गया है ।।
इसी वज़ह से हर किसी को ग़ुरूर हो गया है ।।

ऐतराज मुझे भी नही है किसी की नज़ाक़त पर।।
पर मेरा भी दिल इसमें नासूर हो गया है ।।

भला मिलता ही क्या होगा किसी को बेवफाई से ।।
दिलो में दर्द सहकर भी खुदी से दूर हो गया है ।।

मिले थे कल तो वे बोले तुहारी याद आती है ।।
मग़र हालात के चलते ये दिल मजबूर हो गया है ।।

मुझे मालूम था सब कुछ  फिर भी मैं चला आया ।।
मुझसे दूर रहना अब उन्हें मंजूर हो गया है ।। 

गज़ब है यार ये दुनियां भरोसा अब नही होता ।।
भरोसा तोड़ देना अब यहा दरतूर हो गया है ।।

                          ....  R.K.M

शुक्रवार, 11 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।प्यार की इस नाव पर।।

   ।।ग़ज़ल।।प्यार की इस नाव पर।।

तू रहे खुश ,लुट रहा मैं ,आज तेरे नाँव पर ।।
दिल बिछाकर रो रहा हूँ गिर रहे इस भाव पर ।।

क्या पता इस कत्ल के बाद जिन्दा रह सकू मैं ।।
डगमगाता चल रहा हूँ प्यार की इस नाव पर ।।

मिल रहे थे हौसले जब तुम्हारा साथ था ।
अब नही मलहम लगाता है कोई इस घाव पर ।।

जा समझ में आ गया, यह रहम था प्यार न था ।।
पर कोई कांटा नही था गड़ रहा जो पाँव पर ।।

इस तरह फेंका है तुमने शाहिलो से दूर मुझको ।।
अब कभी न आ सकूगा राहे सकूँ की छाँव पर।।

देख तेरी रहनुमाई प्यार मैं करने लगा था   ।।
थी चार दिन की जिंदगी वो भी लगा दी दाँव पर ।।

    
                      .... R.K.M

गुरुवार, 10 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।सितमगर नही देखा ।।

  ।।ग़ज़ल।।सितमगर नही देखा।।

जिसने इश्क़ में बर्बादियो का मंज़र नही देखा ।।
मेरा दावा है ,शाहिलो पर समन्दर नही देखा ।।

कभी डूबकर बच निकला हो तो कोई बात नही ।।
दिलो में प्यार की कमियो का बंजर नही देखा ।।

बच ही नही पता कोई भी रास्ता गर्दिस में ।।
मंजिले लाख पायीं हो पर खुद का घर नही देखा ।।

बचेगा खाक दामन में ,नही तो प्यार कर देखो ।। 
किसी ने गम से बढ़कर कोई खंजर नही देखा ।। 

मग़र ऐ ! दोस्त होती है अमानत प्यार ही दिल की ।।
डरे है जो नफासत से ,मुकद्दर नही देखा ।।

तन्हा है ,उदासी है ,खमोसी में है रंजोगम ।।
खुदी के दिल से बड़कर के सितमगर नही देखा ।।

                          .....  R.K.M

बुधवार, 9 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।यादो को मिटाने वाले ।।

   ।।ग़ज़ल।।यादो को मिटाने वाले।।

नज़र भर भी नही देखा नज़रो को चुराने वाले ।।
आज फिर आये थे मेरी यादो को मिटाने वाले ।।

बड़ी उम्मीद मुझको थी उनके मुस्कराने की।। 
नाउम्मीद कर गये हर पल के मुस्कराने वाले ।।

ख़ुदा से भी बढ़कर एतबार किया करता था।।
हर वफ़ा भूल गये मुझको रुलाने वाले ।। 

बड़ा सकून मिलता उनके नजर भर उठाने से ।।
मेरी सूरत ही मिटा बैठे फ़सलों को मिटाने वाले ।। 

अब नजऱ न आया नज़रो की काशिस उनको ।।
जिसको ढूढ़ते रहते तस्वीर बनाने वाले ।। 

ये ख़ुदा कभी भी उनका चेहरा नजर न आये ।।
मुझे भूल ही जाये अब मुझको मनाने वाले ।।   

                            .. R.K.M

मंगलवार, 8 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।बर्बाद हुआ दिल ये।।

    ।।ग़ज़ल।।बर्बाद हुआ दिल ये।।



मत सोच तेरे इश्क़ में ,बर्बाद हुआ दिल ये ।।
तन्हाइयो में ,गम में ,नासाद हुआ दिल ये ।।

लगे है जख़्म सच है ,रुस्वाइयो के मारे ।।
मगर तेरी यादों से आबाद हुआ दिल ये ।।

बहे जो आंशू मेरे वो पानी तो नही थे ।।
तेरे चेहरे की झलक से ,आबाद हुआ दिल ये ।।

मैं रब से माग लूगा, खुशिओं की दुआ तेरी ।।
तेरी ही बद्दुआ का फरियाद हुआ दिल ये ।।

अब सीख गया मैं भी दर्दो को सहन करना ।।
वाक़िब ऐ हक़ीक़त वर्षो बाद हुआ दिल ये ।।

                       ....... R.K.M

रविवार, 6 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।तू न समझे तो कोई बात नही ।।

।।ग़ज़ल।।तू न समझे तो कोई बात नही ।।


रोज मिलते है ,तू न समझे तो कोई बात नही ।।
इससे बेहतर ,कोई दुनिया में मुलाकात नही ।। 

तेरी आँखों को, आँखे ये देख लेती है ,बस ।।
इससे बढ़कर इश्क़ की कोई बरसात नही ।। 

तर बतर हो गया मैं तेरे मिलने से पहले ही ।।
ये दिल की हक़ीक़त है सिर्फ मेरे जज़्बात नही ।।

ये खुदा तेरे मिलने की मुराद ही पूरी न हो ।।
अभी मिलकर बिछड़ जाने के हालात नही ।।

सुना है इश्क़ में शाहिलो पर बिछड़ जाते है लोग ।।
तुम बिछड़कर मुस्कुराना और कोई सौगात नही ।।

                          ........R.K.M

।।ग़ज़ल।।मेरे प्यार का मुक़दमा था।।

  ।।ग़ज़ल।।मेरे प्यार का मुक़दमा था।।



तेरी ज़मानत ,मैं गुनेहगार, का मुक़दमा था ।।
मेरे रंजोगम से तेरे प्यार का मुकदमा था ।।

पैरवी कर आँखों ने क्या हाल बना रखा है ।।
किसके थे अश्क़ वो ,अधिकार का मुक़दमा था।।

हर बार मेरी पैमाइशे नाक़ाम होती ही रही ।।
अदालत तो तेरी ही थी ,बेकार का मुक़दमा था ।।

तारीख़ दर तारीख़ बदलती रही तेरे प्यार की ।।
तेरी आजमाइस ,मेरे एतबार का मुकदमा था ।।

आँखों ही आँखों से हर बार ज़िरह होती रही ।।
मेरी ख़्वाहिशे तेरी शौक़ में गयीं हार, का मुक़दमा था ।।

मुझे क्या मालुम ,फ़ैसले इश्क़ में होते नही ।।
मैं उनके कशिश का हो गया शिकार ,का मुक़दमा था।।

                          ......R.K.M

शनिवार, 5 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।तन्हाइयां उन्हे रहती है।।

  ।।ग़ज़ल।।तन्हाइयां उन्हें रहती है।।



सुना है मेरे नाम पर रूसवाइयां उन्हें रहती है ।।
आजकल इश्क़ में तन्हाइयां उन्हें रहती है ।।

ताउम्र गुजार दी मैंने जिनके ही इंतजार में ।।
अब मेरे ही दीदार की दुश्वारियां उन्हें रहती है ।।

पास थे तो खुद की ही अदाओ में मशगूल रहे ।।
दूर है तो प्यार की वफ़ाइया उन्हें रहती है ।।

कल मुझसे ही पूछ बैठे अपने नाम का मतलब ।।
झूठ कह दिया यादों की कमजोरियां मुझे रहती हैं।।

तमाम वज़ह होती है किसी को भूल जाने की ।।
वरना याद तो हर किसी की परछाइयां मुझे रहती है ।।


                   ........ R.K.M

शुक्रवार, 4 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।सज़ा तुमको मिलेगी ही ।।

  ।।ग़ज़ल।।सज़ा तुमको मिलेगी ही।।


निगाहे मत चुरा ,बेशक निगाहें तो पड़ेंगी ही ।।
निगाहें आइना दिल की, हक़ीक़त तो कहेगी ही ।।

नही समझे ,तो मत समझो हमारी चाह को चाहत ।।
सजेगी गम की महफ़िल तो सजा तुमको मिलेगी ही ।।

भले तुमने समझ रखा मेरे अश्क़ों को पानी सा ।।
अगर बरसेंगे ये आंशू ,कली दिल की खिलेगी ही ।।

हमारी ही वज़ह से तुम जरा सा मुस्कुरा पाये ।।
जरा तुम दूर हो देखो कमी मेरी खलेगी ही ।।

गुरुं मतकर अदाओं पर ,तमाशा चार दिन का है ।।
कोई मुड़कर न देखेगा उम्र तेरी ढलेगी ही  ।।

                           .....R.K.M

नशा ए इश्क

ग़ज़ल   नशा ए इश्क अब छोड़ा न जाए ।  जमाने से मगर उलझा न जाए ।   बड़ी मासूम हैं उसकी अदाएं,   कि मुझसे और अब देखा न जाए ।   गरीबों ...