शुक्रवार, 4 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।सज़ा तुमको मिलेगी ही ।।

  ।।ग़ज़ल।।सज़ा तुमको मिलेगी ही।।


निगाहे मत चुरा ,बेशक निगाहें तो पड़ेंगी ही ।।
निगाहें आइना दिल की, हक़ीक़त तो कहेगी ही ।।

नही समझे ,तो मत समझो हमारी चाह को चाहत ।।
सजेगी गम की महफ़िल तो सजा तुमको मिलेगी ही ।।

भले तुमने समझ रखा मेरे अश्क़ों को पानी सा ।।
अगर बरसेंगे ये आंशू ,कली दिल की खिलेगी ही ।।

हमारी ही वज़ह से तुम जरा सा मुस्कुरा पाये ।।
जरा तुम दूर हो देखो कमी मेरी खलेगी ही ।।

गुरुं मतकर अदाओं पर ,तमाशा चार दिन का है ।।
कोई मुड़कर न देखेगा उम्र तेरी ढलेगी ही  ।।

                           .....R.K.M

गुरुवार, 3 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।धोखा खा रहा हूँ मैं।।

    ।।ग़ज़ल।।धोखा खा रहा हूँ मैं।।


गज़ब की आह है तेरी कि भरता जा रहा हूँ मैं ।।
तुम्हारी इक अदा भर से मरता जा रहा हूँ मैं ।।

न मिलती तू ,न जलता मैं तड़पकर, गम की गर्दिश में ।।
लगी है आग तन मन में ,जलता जा रहा हू मैं ।।

न जाने क्या मिला मुझको तुम्हारी आँख में ,हमदम ।।
अँधेरा छा रहा मन में ,बढ़ता जा रहा हूँ मैं ।।

तुम्हे ही देख पाता हूँ यहाँ ,दिल के उजाले में ।। 
नही है रास्ता कोई पर चलता जा रहा हूँ मैं ।।

नही मालूम है मुझको न कोशिस की कभी मैंने ।।
मंजिल पा रहा हूँ मैं कि धोखा खा रहा हूँ मैं ।।

अभी सुरुआत होगी पर सफाई मैं नही दूँगा ।।
तन्हा हूँ ,अकेला ,पर सकूँ तो पा रहा हूँ मैं ।।

                          ........R.K.M

बुधवार, 2 सितंबर 2015

।।गजल।।दर्द ये मंजूर है बेसक।।

   ।।ग़ज़ल।।दर्द ये मंजूर है बेसक ।।



इश्क में गम का आना, दस्तूर है बेसक ।।
हर कोई इस इश्क़ में, मजबूर है बेसक ।।

इश्क़ तो तन्हा की महफ़िल सजाता है ।।
हर किसी का दिल यहाँ बेकसूर है ,बेसक।

प्यार जिसका जितना ही परवान चढ़ता है ।।
उतना ही वह फासलो में दूर है बेसक ।।

इस इश्क़ में दिल के पैमाने नही होते है ।।
पर सभी को चाहतो का गुरूर है बेसक ।।

बस कुछ नही ये सिर्फ है गम इक दरिया ।।
पर हर किसी को दर्द ये मंजूर है बेसक ।।

                        ......R.K.M

मंगलवार, 1 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।खुदी का दिल दुखाया हूँ।।

  ।।ग़ज़ल।।खुदी का दिल दुखाया हूँ ।।


मुझे है याद वो लम्हा अभी न भूल पाया हूँ।।
कभी आँखे ,कभी दिल को ,कभी खुद को रुलाया हूँ ।।

मुझे मालुम नही था कि छिपा है गम का वो मंजर ।।
तेरे चेहरे के दर्पण में तुझे न देख पाया हूँ ।।

तुम्हे तो याद ही होगा तेरी नजरो का अजमाना ।।
छुपा कर आह दिल की मैं हमेसा मुस्कुराया हूँ ।।

तनिक भाये थे दिल को तुम उठे ग़र्दिश के मौसम में ।।
मग़र मुझको पता क्या कि किनारो पर भुलाया हूँ ।।

न जाने आज क्यों मुझको बड़ी तकलीफ़ है होती ।।
भरोसा कर किसी पर मैं खुदी का दिल दुखाया हूँ ।।

यकीनन हमवफा तुमसे नही कोई शिकायत है ।।
खुदी के दिल का पागलपन नही मैं रोक पाया हूँ ।।

                         ........R.K.M

शनिवार, 29 अगस्त 2015

।।ग़ज़ल।।कोशिसे बेकार निकली।।

  ।।ग़ज़ल।।कोशिस बेकार निकली।।


तुम्हे चाहने की मेरी हर कोशिस बेकार निकली ।।
तेरी बेचैनी भी तेरे दिल की वफादार निकली ।।

थकती तो नही है ये नज़र तेरा चेहरा निहारकर ।।
पर तेरी ख़ामोशी पर मेरी हर नज़र बेजार  निकली ।।

इंतजार तेरे इशारों का करता ही रह गया मैं ।।
न जाने किस वज़ह से तू गुमसुदा हर बार निकली ।।

माना कि बेअसर रह गयी हो मेरी चाहते ऐ दोस्त ।।
पर तेरी लापरवाही तो काफ़ी असरदार निकली ।।

काश! कि तुम सुरुआत ही न करने दिये होते मुझे ।।
सम्हल जाता पर तू बेवफा ही आखिरकार निकली ।।

                          .......R.K.M

गुरुवार, 27 अगस्त 2015

।।ग़ज़ल।।मुझे मालुम है।।

      ।।ग़ज़ल।।मुझे मालुम है।।


मेरे ख्वाबो में तेरा चेहरा नजर आयेगा मुझे मालुम है ।।
आज फिर से वही दर्द उभर आयेगा मुझे मालुम है ।।

मेरी तकलीफ का एहसास हो न हो तुम्हे ऐ मेरे दोस्त।।
मेरी मुहब्बत का एहसास तुम्हे होगा मुझे मालुम है ।।

मेरे बहते अश्क पर मुझको भरोसा हो गया अब ।।
उभरेंगे तेरे आँख में भी आंसू मुझे मालुम है ।। 

अब मुफ़्त में तो यहा नशीहते भी नही मिलती है ।।
मैंने तो अपनी जिंदगी ही लुटा दी मुझे मालुम है ।।

इल्म कर तेरी आजमाइस पर कुर्बान कर दी जिंदगी ये।।
यकीनन मेरी ख़ामोशी का असर होगा मुझे मालुम है ।।

ऐ दोस्त तू मिले ,न मिले ,फिर भी कोई बात नही ।।
पर अब मैं तेरा ही होकर जिऊँगा मुझे मालुम है ।।

                         ........R.K.M

रविवार, 23 अगस्त 2015

।।ग़ज़ल।।मुस्कराया न कर।।

      ।।गजल।।मुस्कराया न कर।।


अब रहने भी दे तू मुझे तड़पाया न कर ।
अपनी यादो के तूँफा से रुलाया न कर ।।

फ़िक्र तो कर मेरे दिल के हालात की अब
उन झूठी अदायें को अब दिखाया न कर।

मेरी दिल की चाहत का तुझे एहसास नही
तो मेरे स्वप्नों में आकर मुस्कुराया न कर ।

ख़त्म हो ही जायेगा तख़लीफो का दौर ।
अब मेरी मुहब्बत को तू आजमाया न कर

ऐ दोस्त तुम्हे हक है तेरी जिंदगी जीने का। 
मज़ाक मेरी जिंदगी का भी उड़ाया न कर।

                           ......R.K.M

।।ग़ज़ल।।हालात के चलते मैं।।

   ।।ग़ज़ल।।हालात के चलते मैं।।


तुमसे दूर हूँ तेरे जज़्बात के चलते मैं ।।
खुद से मजबूर हूँ हालात के चलते मैं।।

कोई गम नही तू मुझे याद कर न कर ।।
भीगता हर ऱोज हूँ बरसात के चलते मैं ।

ठहर क्यों जाती हो मेरे दायरे के बाहर ।।
वादा तोड़ न पाया तेरी बात के चलते मैं।

मुफ़्त में उम्र गुजार देना भी गुनाह है ।।
पर रोक न पाया औकात के चलते मैं ।।

ऐ दोस्त रब मिले न मिले तू चली आना ।
तन्हा ही रह जाउगा सौगात के चलते मैं।

                               .......R.K.M

मंगलवार, 18 अगस्त 2015

।।ग़ज़ल।।तन्हा बिताये तो थे।।

।।ग़ज़ल।।तन्हा बिताये तो थे।।


कुछ भी हो, मेरी ख़्वाहिशों के ,लिये मुस्कराये तो थे ।।
कल मेरी यादो से निकलकर, सामने आये तो थे ।।

माना कि वो तब्दीली न आ सकी उनकी अदाओ में ।।
पर मिटाकर फ़ासलों का दर्द, नजरें झुकाये तो थे ।।

जो चले ही गये थे दूर ,मेरे दिल के दायरों से ।।
तोड़कर दुनिया की रश्मे ,वादा निभाये तो थे ।।

अब मुझे यक़ीन है कि मेरी चाहते बेअसर न रही ।।
वक्त कम था और हम भी दिल को लुटाये तो थे ।।

ऐ दोस्त ! तमाम लोग थे ,तेरे जाने के बाद भी यहा ।।
पर तेरी याद में हम ,तन्हा तन्हा बिताये तो थे ।।

                       ...........R.K.M

।।ग़ज़ल।।मुझे मंजूर नही।।

       ।।ग़ज़ल।।मुझे मन्जूर नही।।

तू मेरी जन्नत है पर तेरा कोई कसूर नही ।।
मैं हाथ रख दूँ ,तू जल जाये ,मुझे मंजूर नही ।। 

कसूर ख़ुदा का है ,कोई तो नाम देता इस रिश्ते को ।।
मेरा दिल ,मेरी आँखे ,मैं खुद, भी बेक़सूर नही

फ़िक्र मत कर ,कोई गम नही ,उफ़् तक न करूँगा ।।
मैं खुद ही जल जाऊँगा वो दिन दूर नही ।। 

गुनाह किसी का भी हो ऐ ख़ुदा तू ही फैसला कर ।।
मैं तो बेबस हूँ पर तू तो इतना मज़बूर नही ।।
  
परवाह नही, तू मांग ले जिंदगी भी मुस्करा के ।।
अपने वादे से मुकर जाऊ ,ये मेरा दस्तूर नही ।।

                            .......R.K.M
         

नशा ए इश्क

ग़ज़ल   नशा ए इश्क अब छोड़ा न जाए ।  जमाने से मगर उलझा न जाए ।   बड़ी मासूम हैं उसकी अदाएं,   कि मुझसे और अब देखा न जाए ।   गरीबों ...