सोमवार, 10 अगस्त 2015

।।ग़ज़ल।।कहावत ही बदल डाली।।

  ।।ग़ज़ल।।कहावत ही बदल डाली।।


हमारे प्यार में दिल की मिलावट ही बदल डाली ।।
बड़ा मासूम था चेहरा दिखावट ही बदल डाली ।।

पिघल जाते है पथ्थर भी किसी का प्यार पाकर के ।।
गज़ब हो यार तुमने तो कहावत ही बदल डाली ।।

लिखा तकदीर में रब ने तुम्ही से प्यार करना था ।।
रब को दे गये चकमा लिखावट ही बदल डाली ।।

सजे थे प्यार के नगमे सजीं थीं आँख में खुशिया ।।
बड़े खुदगर्ज़ निकले तुम सजावट ही बदल डाली ।।

बने थे रास्ते तुम तक पहुचने के हजारो ही ।।
न जाने क्या मिला तुमको बनावट ही बदल डाली ।।

                            ....... R.K.M

।।ग़ज़ल।।करीब से देखा तो है।।

  ।।गज़ल।।क़रीब से देखा तो है।।


आज तेरी आँखों में अज़ीब सा देखा तो है ।।
कभी न मिलने वाला नसीब सा देखा तो है।।

कोई बात नही मेरे हालात न समझे हो तुम ।।
मेरे दिल को तुमने गरीब सा देखा तो है ।।

लोग करते है बेवफाई दिल टूटने के बाद यहा ।।
किये न किये उस तरकीब से देखा तो है ।।

गज़ब के यार हो तुम भी मगर पथ्थर नही लगते ।।
तुम्हारी उन अदाओ को क़रीब से देखा तो है ।।

उत्तर पाया नही है अभी मेरा प्यार तेरी आँखों में ।।
तेरी चाहत को नजरो की जरीब से देखा तो है ।।
 

                              .......R.K.M

गुरुवार, 6 अगस्त 2015

।।गज़ल।।मंजिल ही भुला बैठे है ।।

तुम्हे चाहकर अपनी मुश्किल ही बढ़ा बैठे है ।।
रास्ते और है पर मंजिल ही भुला बैठे है ।।

मत सोच कि तेरी अदाओ की कोई मिसाल नही ।।
ये तो हम है कि आपसे दिल ही लगा बैठे है ।। 

बेताब और भी लोग है फ़ासले मिटाने के लिये ।।
दिल के करीब रखकर बोझिल ही बना बैठे है ।।

तुमसे मिलना इक इत्तिफ़ाक है कोई चाल नही ।।
जबकि तेरी चाहत में ही खुद को गवां बैठे है ।।

फिर भी मत सोच तुमसे प्यार नही करता मैं ।।
तेरे इंतजार में महफ़िल को सजा बैठे है ।।

                           .......  R.K.M

बुधवार, 5 अगस्त 2015

।।गज़ल।।मुझे मोहलत नही देती ।।

  ।।गज़ल।।मुझे मोहलत नही देती ।।


कौन कहता है कि तू झलक-ऐ-जन्नत नही देती ।।
पर ये दुनिया तुम्हे देखने की इजाजत नही देती ।।

कसम तो खायी थी मैंने कभी न दिल लगाने की ।।
तुझे न देखू तो आँखे मुझे राहत नही देती ।।

पलटकर देख लेते तो तुम्हारा क्या बिगड़ जाता ।।
तुम्हारी सबनमी पलके मुझे मोहलत नही देती ।।

तुमारी शान्त सी चितवन, तुम्हारी झील सी आँखे।।
करू मैं लाख कोशिक पर कोई हलचल नही देती ।।

तुम्हारे चाँद से चेहरे से, मेरा दिल धड़कता है ।।
नजर की सादगी इतनी कोई आहट नही देती ।।

करू मैं लाख कोशिस पर इरादा टूट जाता है ।।
नजर मैं भी चुराता न, तेरी चाहत नही देती ।।
                             .......R.K.M

सोमवार, 3 अगस्त 2015

।।ग़ज़ल।।बर्बाद नही करता हूँ।।

   ।।गज़ल।।बर्बाद नही करता हूँ।।


दर्द कितना भी हो दोस्त तुम्हे याद नही करता हूँ।।
यकीं कर तुमसे मिलने की फरियाद नही करता हूँ ।।

डर मुझे भी है दोस्त गम के उन थपेड़ो का ।।
तभी तो इन आंशुओं को बर्बाद नही करता हूँ ।।

कही टूट न जाये कहर तुम पर मेरी यादो का ।।
दिल को रोका हूँ तभी,आबाद नही करता हूँ ।।

फ़िक्र मत कर टूट भी जाऊ तो कोई गम नही ।।
बेवफाई मैं टूटने के बाद भी नही करता हूँ ।।

जा चली जा मेरी यादो के शाये से दूर कही ।।
मैं भी भुला दूँगा पर उन्माद नही करता हूँ ।।

                            .......R.K.M

रविवार, 2 अगस्त 2015

।।गजल।।तबाह हो जायेगा तू।।

   ।।ग़ज़ल।।तबाह हो जायेगा तू।।

जब किसी हशीना की निगाह हो जायेगा तू ।।
फ़िक्र मत कर ऐ दोस्त तबाह हो जायेगा तू ।।

इक अदा, इक हँसी, इक याद के बदले दोस्त।।
लम्हा लम्हा, तन्हा का आगाह हो जायेगा तू ।।

मांगकर लाओगे जन्नत की ख़ुशी उसके लिये ।।
मगर अपनी ही जिंदगी से बेपरवाह हो जायेगा तू ।।

माना की बदनामियों का खौफ़ न होगा तुमको ।।
और उनके दिलो का शहंशाह हो जायेगा तू ।।

यकीनन आयेगे तेरे हिस्से में ख़ुशी के दो पल ।।
पर गमो के हर पल का गवाह हो जायेगा तू ।।

                          .........R.K.M

शनिवार, 1 अगस्त 2015

।।ग़ज़ल।।चलो हम दोस्ती कर ले ।।

    ।।ग़ज़ल।।चलो हम दोस्ती कर ले।।


न हम है मोम के पथ्थर ,सहारा तो मिलेगा ही ।।
चलो हम दोस्ती कर ले किनारा तो मिलेगा ही ।।

न तुम मिलते, न बस पाता हमारे आँख में चेहरा ।।
हँसी के साथ दो पल गम, प्यारा तो मिलेगा ही।।

भले अंजान हो मुझसे दिलो से पूछ तुम लेना ।।
इज्जत, बेकसी, चाहत, सारा तो मिलेगा ही ।।

करेगी बेवफाई ये भरोसा उम्र का मत कर ।।
यहा हर शख़्स इस गम का मारा तो मिलेगा ही ।।

बड़ा आराम आयेगा कभी जब मुस्करा दोगे ।।
न रब खुद छीन सकता है हमारा तो मिलेगा ही ।।

                            ........R.K.M

शुक्रवार, 31 जुलाई 2015

।।गजल।।गुलाब तेरे घर का।।

     ।।गजल।।गुलाब तेरे घर का ।।


रास्ता है कितना लाजबाब तेरे घर का ।।
मुझे पसन्द आया वो गुलाब तेरे घर का ।।

मेरे हाथो में मयस्कर न हुआ कोई गम नही ।।
नजर में तो आया वो ख्वाब तेरे घर का ।।

तुम न बुलावो तो भी चला आउगा मैं ।।
मैं हो गया हूँ इतना बेताब तेरे घर का ।।

तेरी ही गलियोँ में तू नजर आयी थी मुझे ।।
बाक़ी है अभी भी कुछ हिसाब तेरे घर का ।।

हर्ज क्या है मेरे आने पर पर्दा उठा देने से ।। 
मैं खुद बन गया हूँ इक आफ़ताब तेरे घर का ।।

                         ........  R.K.M

सोमवार, 27 जुलाई 2015

।।इंसान बनाना है।।

        ।।गज़ल।।इंसान बनाना हैं।। 


अब मंजिलो की राहे आसान बनाना है ।।
हर आदमी को फिर से इंसान बनाना है ।।

क्यूं दिल में थम गया है जज़्बा वो प्यार का ।।
हमदिली का दिल में तूफ़ान बनाना है ।।

न कोई तुमसे रूठे न दिल किसी का तोड़ो ।।
हर महफ़िलो में तुमको निसान बनाना है ।।

माना की सबको मिलती जन्नत नही यहा  पर ।।
उनको यही पर रहकर भगवान बनाना है ।। 

हर रिश्ता है प्यारा रिस्तो की क़द्र करिये ।।
इस जिंदगी में दोस्ती आसान बनाना है ।।

                       .........R.K.M

शुक्रवार, 24 जुलाई 2015

।।ग़ज़ल।।तेरे इनकार से पहले।।

   ।।गजल।।तेरे इनकार से पहले ।।


मायूसी मत दिखावो तुम सुरु दीदार से पहले ।।
भरोसा मैं दिलाऊँगा तेरे इनकार से पहले ।।

कोशिस मैं करूँगा की न निकले आँख से आंशू ।।
अपना दिल बिछा दूँगा किसी बौछार से पहले ।।

बहुत है शौक देखूँ मैं तुम्हारा रात दिन चेहरा ।।
निकल जायेगी जां मेरी तेरे इनकार से पहले ।।

फ़िक्र मत कर कभी भी न तेरा दिल दुखाउगा ।।
न कोई कश्म अब होगी तेरे इज़हार से पहले ।।

अगर मौका मिलेगा तो रब से माग मैं लूँगा ।।
तुम्हे, तेरी मुहब्बत को, किसी भी हार से पहले ।।

                        .........R.K.M

नशा ए इश्क

ग़ज़ल   नशा ए इश्क अब छोड़ा न जाए ।  जमाने से मगर उलझा न जाए ।   बड़ी मासूम हैं उसकी अदाएं,   कि मुझसे और अब देखा न जाए ।   गरीबों ...