सोमवार, 3 अगस्त 2015

।।ग़ज़ल।।बर्बाद नही करता हूँ।।

   ।।गज़ल।।बर्बाद नही करता हूँ।।


दर्द कितना भी हो दोस्त तुम्हे याद नही करता हूँ।।
यकीं कर तुमसे मिलने की फरियाद नही करता हूँ ।।

डर मुझे भी है दोस्त गम के उन थपेड़ो का ।।
तभी तो इन आंशुओं को बर्बाद नही करता हूँ ।।

कही टूट न जाये कहर तुम पर मेरी यादो का ।।
दिल को रोका हूँ तभी,आबाद नही करता हूँ ।।

फ़िक्र मत कर टूट भी जाऊ तो कोई गम नही ।।
बेवफाई मैं टूटने के बाद भी नही करता हूँ ।।

जा चली जा मेरी यादो के शाये से दूर कही ।।
मैं भी भुला दूँगा पर उन्माद नही करता हूँ ।।

                            .......R.K.M

रविवार, 2 अगस्त 2015

।।गजल।।तबाह हो जायेगा तू।।

   ।।ग़ज़ल।।तबाह हो जायेगा तू।।

जब किसी हशीना की निगाह हो जायेगा तू ।।
फ़िक्र मत कर ऐ दोस्त तबाह हो जायेगा तू ।।

इक अदा, इक हँसी, इक याद के बदले दोस्त।।
लम्हा लम्हा, तन्हा का आगाह हो जायेगा तू ।।

मांगकर लाओगे जन्नत की ख़ुशी उसके लिये ।।
मगर अपनी ही जिंदगी से बेपरवाह हो जायेगा तू ।।

माना की बदनामियों का खौफ़ न होगा तुमको ।।
और उनके दिलो का शहंशाह हो जायेगा तू ।।

यकीनन आयेगे तेरे हिस्से में ख़ुशी के दो पल ।।
पर गमो के हर पल का गवाह हो जायेगा तू ।।

                          .........R.K.M

शनिवार, 1 अगस्त 2015

।।ग़ज़ल।।चलो हम दोस्ती कर ले ।।

    ।।ग़ज़ल।।चलो हम दोस्ती कर ले।।


न हम है मोम के पथ्थर ,सहारा तो मिलेगा ही ।।
चलो हम दोस्ती कर ले किनारा तो मिलेगा ही ।।

न तुम मिलते, न बस पाता हमारे आँख में चेहरा ।।
हँसी के साथ दो पल गम, प्यारा तो मिलेगा ही।।

भले अंजान हो मुझसे दिलो से पूछ तुम लेना ।।
इज्जत, बेकसी, चाहत, सारा तो मिलेगा ही ।।

करेगी बेवफाई ये भरोसा उम्र का मत कर ।।
यहा हर शख़्स इस गम का मारा तो मिलेगा ही ।।

बड़ा आराम आयेगा कभी जब मुस्करा दोगे ।।
न रब खुद छीन सकता है हमारा तो मिलेगा ही ।।

                            ........R.K.M

शुक्रवार, 31 जुलाई 2015

।।गजल।।गुलाब तेरे घर का।।

     ।।गजल।।गुलाब तेरे घर का ।।


रास्ता है कितना लाजबाब तेरे घर का ।।
मुझे पसन्द आया वो गुलाब तेरे घर का ।।

मेरे हाथो में मयस्कर न हुआ कोई गम नही ।।
नजर में तो आया वो ख्वाब तेरे घर का ।।

तुम न बुलावो तो भी चला आउगा मैं ।।
मैं हो गया हूँ इतना बेताब तेरे घर का ।।

तेरी ही गलियोँ में तू नजर आयी थी मुझे ।।
बाक़ी है अभी भी कुछ हिसाब तेरे घर का ।।

हर्ज क्या है मेरे आने पर पर्दा उठा देने से ।। 
मैं खुद बन गया हूँ इक आफ़ताब तेरे घर का ।।

                         ........  R.K.M

सोमवार, 27 जुलाई 2015

।।इंसान बनाना है।।

        ।।गज़ल।।इंसान बनाना हैं।। 


अब मंजिलो की राहे आसान बनाना है ।।
हर आदमी को फिर से इंसान बनाना है ।।

क्यूं दिल में थम गया है जज़्बा वो प्यार का ।।
हमदिली का दिल में तूफ़ान बनाना है ।।

न कोई तुमसे रूठे न दिल किसी का तोड़ो ।।
हर महफ़िलो में तुमको निसान बनाना है ।।

माना की सबको मिलती जन्नत नही यहा  पर ।।
उनको यही पर रहकर भगवान बनाना है ।। 

हर रिश्ता है प्यारा रिस्तो की क़द्र करिये ।।
इस जिंदगी में दोस्ती आसान बनाना है ।।

                       .........R.K.M

शुक्रवार, 24 जुलाई 2015

।।ग़ज़ल।।तेरे इनकार से पहले।।

   ।।गजल।।तेरे इनकार से पहले ।।


मायूसी मत दिखावो तुम सुरु दीदार से पहले ।।
भरोसा मैं दिलाऊँगा तेरे इनकार से पहले ।।

कोशिस मैं करूँगा की न निकले आँख से आंशू ।।
अपना दिल बिछा दूँगा किसी बौछार से पहले ।।

बहुत है शौक देखूँ मैं तुम्हारा रात दिन चेहरा ।।
निकल जायेगी जां मेरी तेरे इनकार से पहले ।।

फ़िक्र मत कर कभी भी न तेरा दिल दुखाउगा ।।
न कोई कश्म अब होगी तेरे इज़हार से पहले ।।

अगर मौका मिलेगा तो रब से माग मैं लूँगा ।।
तुम्हे, तेरी मुहब्बत को, किसी भी हार से पहले ।।

                        .........R.K.M

गुरुवार, 23 जुलाई 2015

।।गजल।।आदत न होती थी।।

   ।।गजल।।आदत न होती थी ।।

वजह कुछ भी रही हो पर कोई आहट न होती थी ।।
कोई गम भी नही था तब कही हुज्जत न होती थी ।।

न मंजिल थी न वादा था न तेरी रहनुमाई थी ।।
अकेला था अकेले में कोई दिक्कत न होती थी ।।

मिले हो तुम हमे जब से नजारे खुद अचंभित है ।।
किसी को देखते रहना मेरी आदत न होती थी ।।  

मग़र हैरान हूँ कल से तुम्हारी इक झलक पाकर ।।
किसी के पास आने की कभी हसरत न होती थी ।। 

करूगा मैं इशारा तो न तुम मौन हो जाना ।।
किसी के दिल दुखाने की कभी चाहत न होती थी ।।

                         .........R.K.M

बुधवार, 22 जुलाई 2015

।।गजल।।कुछ तो बहाना चाहिए।।

   ।।गज़ल।।कुछ तो बहाना चाहिए ।।

हद हो गयी अब तो तुम्हे मुस्कुराना चाहिए ।।
ऐ दोस्त तेरे दीदार का कुछ तो बहाना चाहिए ।।

कल परसो से इसारा कर रहा हूँ मैं तुम्हे ।।
अब तेरी भी अदा कुछ खास होनी चाहिएे ।।

मत झुका अपनी नजर तू नजर भर देखने दे ।।
उस नजर को इस नजर के पास आना चाहिए ।। 

हो गया मुझको यकी न कभी तू न कहेगी ।।
हा कहने में तुम्हे भी उफ़ न कहना चाहिए ।।

आ हमारी आँख का बन जा कोई नमकीन मरहम ।।
है यकीं तुम पर तुम्हे अब मान जाना चाहिए ।। 

                     ..........R.K.M

सोमवार, 20 जुलाई 2015

।।ग़ज़ल।।तुझको भुलाने के लिये।।

    ।।गज़ल।।तुझको भुलाने के लिये।।


वफ़ा तो चाहिये ही सक को मिटाने के लिये ।।
वक्त भी आयेगा  दोस्त वादा निभाने के लिये ।।

जा चली जा मेरी नजर से दूर हो जा अब ।।
फिर कभी भी न आना अश्क बहाने के लिये ।।

न जाने कितने आंशू गिर गये तेरी यादो में ।। 
पर शायद वो भी कम थे तुझको भुलाने के लिये ।।

सज़ा क्यों मिली है मुझे मेरी बेगुनाही की ।।
क्या क्या लुटा बैठा हूँ तुमको मनाने के लिये ।।

जा मुझसे दूर हो जा मेरी याद मत करना कभी ।
बहुत है लोग यहाँ तेरे दिल को आजमाने के लिये ।।।

तुम आये तेरा सुक्रिया पर दिल टूट जाने के बाद ।।
भरोसा तो चाहिए ही दिल को लगाने के लिये ।।

                              ........R.K.M

गुरुवार, 16 जुलाई 2015

।।गज़ल।।तेरी इज्जत नही होती।।

  ।।गजल।।तेरी इज्जत नही होती ।।

ऐ दोस्त तू मेरे प्यार की जन्नत नही होती ।।
तो सच है इस दिल में तेरी इज्जत नही होती ।।

लोग करते है दुआ, रब से ख्वाहिशो के लिये ।।
पर मेरे लिये तेरे शिवा कुछ मन्नत नही होती ।।

तू खुशनुमा न होती,तू हमवफा न होती ।।
तो तुम्हे देखने की लत इल्लत नही होती ।।

जब जब मिले है तुमसे ,बस मुस्कराया तुमने ।।
वरना इस तरह बेबस मेरी आदत नही होती ।। 

तू जिंदगी का शाहिल, खुद जिंदगी है मेरी ।।
अब तेरे शिवा कुछ भी हसरत नही होती ।।

                     ...........R.K.M

नशा ए इश्क

ग़ज़ल   नशा ए इश्क अब छोड़ा न जाए ।  जमाने से मगर उलझा न जाए ।   बड़ी मासूम हैं उसकी अदाएं,   कि मुझसे और अब देखा न जाए ।   गरीबों ...