रविवार, 27 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।मुझे प्यार का तजुर्बा था।।

।।ग़ज़ल।।मुझे प्यार का तजुर्बा था ।।

राह ऐ मुहब्बत से गया हार का तजुर्बा था ।।
तुझे तेरी अदा मुझे प्यार का तजुर्बा था ।।

लाख़ नाकामियो के बाद भी हौसले मिलते रहे ।।
रह गया तन्हा कि इंतजार का तजुर्बा था ।।

तू मिलती तो थी किसीे और के ख़ातिर ही सही ।।
मुझे मेरी आँखों को दीदार का तजुर्बा था ।।

अब तक तेरे आने की तारीख़ ने दस्तख़त न दी ।।
झूठा था तेरा वादा पर एतबार का तर्जुबा था ।।

रूबरू हुये भी तो आग लगा बैठे दिल में ।।
वर्षो बाद कर ही दिये इनकार का तजुर्बा था ।।

ऐ "साहिलो" पर छोड़ कर चले जाने वाले दोस्त ।।
मैं रह ही गया ख़िदमत में बेकार का तजुर्बा था ।।

   
                       .. R.K.M

शनिवार, 26 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।इंसान नही मिलते है ।।

  ।।ग़ज़ल।।इंसान नही मिलते है।।


ये इश्क़ है दोस्त यहा पर ईमान नही मिलते है।।
इस इश्क की दुनिया में इंसान नही मिलते है।।

तोड़ देगे दिल हरहाल किसी 'साहिल' पर ।।
यहा दर्द के शिवा कुछ इनाम नही मिलते है ।। 

नाम तक मिट जाता वफ़ा की कोई बात नही ।।
राहे मुहब्बत पर कुछ निसान नही मिलते है ।।

अदाओ की कशिश की कोई परवाह नही होगी तब ।।
'साहिल' पर फ़िसले तो गुमान नही मिलते है ।।

हर शख़्स गम का मारा हर ओर गुमसुदा सब ।।
हर ओर बेखुदी है यहा हैरान नही मिलते है ।। 

इस इश्क़ की महफ़िल में हर तऱफ रंजोगम हैं ।।
यहा कारवाँ निकलता अंजान नही मिलते है ।।

                             ..R.K.M

शुक्रवार, 25 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।तेरी आजमाइस पर खरा उतरूंगा।।

।।ग़ज़ल।।आजमाइस पर खरा उतरूंगा।।

मिल न सकी दर्दो से रहाइस पर खरा उतरूंगा ।।
तेरी चाहत' तेरे सपने' तेरी ख़्वाइस पर खरा उतरूंगा ।।

यक़ीन न हो तो जायज़ा ले ले मेरे दिल का ।।
मैं तेरे दिल की हर आजमाइस पर खरा उतरूंगा ।।

तुझे भी भुला दूँगा' तेरी ख़ुशी के लिये ऐ दोस्त ।।
कर के देख 'तेरी फरमाइस पर खरा उतरूंगा ।।

नसीब में होगा गम तो आयेगा तेरे हिस्से में भी ।।
मेरी मत करना कोई पैमाइस पर खरा उतरूंगा ।।

ये मेरे वादे है तेरी कोई तेरी झूठी सौगात नही ।।
मैं तेरे 'साहिल' की हर नुमाइस पर खरा उतरूंगा ।।

                        ..R.K.M

गुरुवार, 24 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।दिल जलाना तो पड़ेगा ही।।

।।ग़ज़ल।।दिल जलाना तो पड़ेगा ही।।


रहा बरसो से ख़ाली दिल जलाना तो पड़ेगा ही ।।
अग़र शौक़ ऐ मुहब्बत तो बताना तो पड़ेगा ही ।।

तुम्हे है प्यार करना तो जरा फिर सोच लेना तुम ।।
यहा पर गम भरे तन्हे बिताना तो पड़ेगा ही ।।

अभी है वक्त रहने दो बड़ी ज़ालिम ये दुनिया है ।।
बनेंगे क़हक़हे हरपल भुलाना तो पड़ेगा ही ।

हमारी दोस्ती के पल यक़ीनन तुम भुला दोगे ।।
मग़र रश्मे मुहब्बत को निभाना तो पड़ेगा ही ।।

यहा के रहनुमा कातिल सितमगर बन ही जाते है ।।
अग़र है घाव गहरा तो दिखाना तो पड़ेगा ही ।। 

ईलाजे दर्द की ख़्वाहिश यहा पूरी न होती है ।।
न होंगे आँख में आँशू बहाना तो पड़ेगा ही ।।

लुटते देख ख़ुद को भी शिकायत कर न पाओगे ।।
दिलो में दर्द होगा पर मुस्कराना तो पड़ेगा ही ।। 

                      R.K.M

बुधवार, 23 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।यहा सब गम के मारे है।।

  ।।ग़ज़ल।।यहा सब गम के मारे है।।

भरे है दर्द तन्हा से यहा जितने किनारे है ।।
यहा मुझको नही रहना यहा सब गम के मारे है ।।

बड़े दिन बाद आया था तुम्हारे साथ साहिल पर ।।
सहारा कौन देगा जब यहा सब बेसहारे है ।। 

चलो ऐ दोस्त चलकरके अलग महफ़िल सजाये हम ।।
मुनासिब अब नही रहना यहा तो बस बेचारे है ।।

मुहब्बत में तबाही का मुझे न शौक़ कोई है ।।
हमारी दोस्ती में ही सभी चन्दा सितारे है ।। 

अग़र है चाह तुमको तो किसी से प्यार कर देखो ।।
मुझे रुकना नही पल भर यही पर दर्द सारे है ।।

                             .. R.K.M

मंगलवार, 22 सितंबर 2015

।।हुआ बदनाम साहिल पर ।।

.।।ग़ज़ल।।हुआ बदनाम साहिल पर।।


दरिया से निकलकर मैं हुआ नाकाम साहिल पर ।।
महज़ तेरे प्यार के ख़ातिर हुआ बदनाम साहिल पर ।।

बड़े नायाब होते है तुम्हारे प्यार के तोहफ़े ।।
जिसे मिलता वही फिरता यहा गुमनाम साहिल पर ।।

यहा के रहबरों को भी न जाने क्या हुआ होगा ।।
जिसे देखो वही लेता तुम्हारा नाम साहिल पर ।।

यहा तन्हा की बस्ती में ग़ज़ब के गम उभरते है ।।
तुम्हारे रूप से मिलता बड़ा आराम साहिल पर ।।

तुम्हारी ही अदाओ से यहा रौनक उभरती है ।।
दरिया तक भटकते है सुबह से शाम साहिल पर ।।

मैं था ढूढ़ने आया यहा पर दर्द का मरहम ।।
हक़ीक़त से न वाक़िब था लगा इल्जाम साहिल पर ।।

कभी चर्चा जो होती तो हमारा नाम आता था ।।
बनाकर अज़नबी छोड़ा हुआ बेनाम साहिल पर ।।

रहने दो अभी तक तो पुराने गम ही काफ़ी है ।।
अग़र भटके चला लेंगे इसी से काम साहिल पर ।। 

                           R.K.M

रविवार, 20 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।परिन्दे तक भी रोये है ।।



इरादा इश्क़ का था पर निखालिश गम ही पाये है ।।
लुटा दी जिंदगी जिन पर वही मुझको भुलाये है ।।

जहा फेका था खत मेरा वहा से मैं उठा लाया ।।
फ़टे काग़ज़ के टुकड़ो को अभी तक हम संजोये है ।।

तरीके और भी थे दोस्त तेरे इनकार करने के ।।
काँटे क्यों बने दिल के फूल मैंने जो बोये थे ।।

कल तक भूल जाने की कोशिश की थी मैंने भी ।।
मग़र यादों से फ़ुर्सत ही शायद हम न पाये है ।।

अगर फुर्सत तुम्हे हो तो यकीं मानो चले आओ ।।
तुम्हारी याद में कल से परिंदे तक भी रोये है ।।

चले जाना न रोकूँगा दिखाकर रूप अपना तुम ।।
गज़ब की नींद आयेगी रातो भर न सोये है ।। 

तनिक भी फ़िक्र मत करना मेरे हालात पर तुम भी  ।।
बड़ा आराम मिलता है तभी पलके भिगोये है ।।

                          .. R.K.M

।।ग़ज़ल।।तुम्हे परहेज़ इतना था।।

  ।।ग़ज़ल।।तुम्हे परहेज़ इतना था ।।

बरसो तक तो तेरी चाहत का क्रेज इतना था ।।
तू ही तू थी तेरी अदाओ का पेज़ इतना था।।

ऐ दोस्त अब आये ही क्यों हो मनाने के लिये ।।
जब मेरी आदतो से तुम्हे परहेज़ इतना था ।। 

अश्क तो बहना ही था उस बेहिसाब मुहब्बत में ।।
जब हँसी थी तो मुझसे क्यों गुरेज़ इतना था ।।

ये दिल है तेरी बदलती अदाओ का कोई रुख नही ।।
क्या हो गया तेरे गुरूर का दहेज़ इतना था ।।

आज क्यों हो गया है उदास ये गुलाब सा चेहरा ।।
अभी कल तक तो बेसुमार तेज इतना था ।। ।।

जा अब लौट जा ऐ सितमगर ऐ संगदिल ।।
लिया चाहतो को मैंने भी सहेज इतना था ।।

                            ...R.K.M

शनिवार, 19 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।सितमगर मैं दिखाता हूँ।।

   ।।ग़ज़ल।।सितमगर मैं दिखाता हूँ।।

चलो वीरान बस्ती के सभी घर मैं दिखाता हूँ ।।
रुको तुम साथ शाहिल पर समुन्दर मैं दिखाता हूँ ।।

यहा हैं गम के मारे वे जिन्हें सब कुछ मुअन्सर था ।।
लगा इनके दिलो में जो खंजर मैं दिखाता हूँ ।। 

जिनके हाथ है मलहम उन्हें भी घाव है गहरा ।।
छिपी मुस्कान में देखो सितमगर मैं दिखाता हूँ ।।

न राहे है ,न वादे है ,न कोई फर्ज का कायल ।।
न कोई नाम है दिल का वो बंजर मैं दिखाता हूँ ।।

यहा पर लूटने-लुटने की हसरत अब नही होती ।।
तड़पते गम की आहो का मंजर मैं दिखाता हूँ ।।

बड़ी मुद्दत से ही हमदम यहा से बच निकल पाया ।।
यही हालात हैं दिल के अक्सर मैं बताता हूँ ।।

                          R.K.M

शुक्रवार, 18 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।दिल को जलाने के लिये।।

��।।ग़ज़ल।।इस दिल को जलाने के लिये ।।��

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भरोसा तो चाहिये दोस्त मुहब्बत निभाने के लिये ।।
दिल पर पथ्थर भी रख लेंगे आजमाने के लिये ।।
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सिर्फ नज़रो के इशारों की हम तवज्जो नही करते ।।
कोई भी मिल जायेगा यहा मुस्कराने के लिये ।।
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हर बार की तरह तुम भी कुरेद जावोगे मेरे दिल को ।।
तब गम भी नही बच पायेगा गवाने के लिये ।। 
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मेरे दिल टूटने के किस्से इतने हमआम हो गये है कि
अब महफिले भी नही मिलती दर्द छुपाने के लिये ।। 
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हर बार धोखा ही पाया है अदाओ पर इल्म करके ।।
अदायें तो होती ही है बस दिखाने के लिये ।।
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गर्दिशों के दौर से गुजर आया हूँ ये मेरे दोस्त ।।
बेवज़ह वक्त बर्बाद न कर मुझे लुभाने के लिये ।।
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अब इन आँखों में प्यार की तस्वीरें नही बनती है ।।
तुम होगी कोई हशीना इस जमाने के लिये ।। 
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जा कल पूछ कर आना अपने दिल से तन्हाइयो में ।।
वरना आना ही मत इस दिल को जलाने के लिये ।।

           ✏✏✏.R.K.M

नशा ए इश्क

ग़ज़ल   नशा ए इश्क अब छोड़ा न जाए ।  जमाने से मगर उलझा न जाए ।   बड़ी मासूम हैं उसकी अदाएं,   कि मुझसे और अब देखा न जाए ।   गरीबों ...