बुधवार, 23 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।यहा सब गम के मारे है।।

  ।।ग़ज़ल।।यहा सब गम के मारे है।।

भरे है दर्द तन्हा से यहा जितने किनारे है ।।
यहा मुझको नही रहना यहा सब गम के मारे है ।।

बड़े दिन बाद आया था तुम्हारे साथ साहिल पर ।।
सहारा कौन देगा जब यहा सब बेसहारे है ।। 

चलो ऐ दोस्त चलकरके अलग महफ़िल सजाये हम ।।
मुनासिब अब नही रहना यहा तो बस बेचारे है ।।

मुहब्बत में तबाही का मुझे न शौक़ कोई है ।।
हमारी दोस्ती में ही सभी चन्दा सितारे है ।। 

अग़र है चाह तुमको तो किसी से प्यार कर देखो ।।
मुझे रुकना नही पल भर यही पर दर्द सारे है ।।

                             .. R.K.M

मंगलवार, 22 सितंबर 2015

।।हुआ बदनाम साहिल पर ।।

.।।ग़ज़ल।।हुआ बदनाम साहिल पर।।


दरिया से निकलकर मैं हुआ नाकाम साहिल पर ।।
महज़ तेरे प्यार के ख़ातिर हुआ बदनाम साहिल पर ।।

बड़े नायाब होते है तुम्हारे प्यार के तोहफ़े ।।
जिसे मिलता वही फिरता यहा गुमनाम साहिल पर ।।

यहा के रहबरों को भी न जाने क्या हुआ होगा ।।
जिसे देखो वही लेता तुम्हारा नाम साहिल पर ।।

यहा तन्हा की बस्ती में ग़ज़ब के गम उभरते है ।।
तुम्हारे रूप से मिलता बड़ा आराम साहिल पर ।।

तुम्हारी ही अदाओ से यहा रौनक उभरती है ।।
दरिया तक भटकते है सुबह से शाम साहिल पर ।।

मैं था ढूढ़ने आया यहा पर दर्द का मरहम ।।
हक़ीक़त से न वाक़िब था लगा इल्जाम साहिल पर ।।

कभी चर्चा जो होती तो हमारा नाम आता था ।।
बनाकर अज़नबी छोड़ा हुआ बेनाम साहिल पर ।।

रहने दो अभी तक तो पुराने गम ही काफ़ी है ।।
अग़र भटके चला लेंगे इसी से काम साहिल पर ।। 

                           R.K.M

रविवार, 20 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।परिन्दे तक भी रोये है ।।



इरादा इश्क़ का था पर निखालिश गम ही पाये है ।।
लुटा दी जिंदगी जिन पर वही मुझको भुलाये है ।।

जहा फेका था खत मेरा वहा से मैं उठा लाया ।।
फ़टे काग़ज़ के टुकड़ो को अभी तक हम संजोये है ।।

तरीके और भी थे दोस्त तेरे इनकार करने के ।।
काँटे क्यों बने दिल के फूल मैंने जो बोये थे ।।

कल तक भूल जाने की कोशिश की थी मैंने भी ।।
मग़र यादों से फ़ुर्सत ही शायद हम न पाये है ।।

अगर फुर्सत तुम्हे हो तो यकीं मानो चले आओ ।।
तुम्हारी याद में कल से परिंदे तक भी रोये है ।।

चले जाना न रोकूँगा दिखाकर रूप अपना तुम ।।
गज़ब की नींद आयेगी रातो भर न सोये है ।। 

तनिक भी फ़िक्र मत करना मेरे हालात पर तुम भी  ।।
बड़ा आराम मिलता है तभी पलके भिगोये है ।।

                          .. R.K.M

।।ग़ज़ल।।तुम्हे परहेज़ इतना था।।

  ।।ग़ज़ल।।तुम्हे परहेज़ इतना था ।।

बरसो तक तो तेरी चाहत का क्रेज इतना था ।।
तू ही तू थी तेरी अदाओ का पेज़ इतना था।।

ऐ दोस्त अब आये ही क्यों हो मनाने के लिये ।।
जब मेरी आदतो से तुम्हे परहेज़ इतना था ।। 

अश्क तो बहना ही था उस बेहिसाब मुहब्बत में ।।
जब हँसी थी तो मुझसे क्यों गुरेज़ इतना था ।।

ये दिल है तेरी बदलती अदाओ का कोई रुख नही ।।
क्या हो गया तेरे गुरूर का दहेज़ इतना था ।।

आज क्यों हो गया है उदास ये गुलाब सा चेहरा ।।
अभी कल तक तो बेसुमार तेज इतना था ।। ।।

जा अब लौट जा ऐ सितमगर ऐ संगदिल ।।
लिया चाहतो को मैंने भी सहेज इतना था ।।

                            ...R.K.M

शनिवार, 19 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।सितमगर मैं दिखाता हूँ।।

   ।।ग़ज़ल।।सितमगर मैं दिखाता हूँ।।

चलो वीरान बस्ती के सभी घर मैं दिखाता हूँ ।।
रुको तुम साथ शाहिल पर समुन्दर मैं दिखाता हूँ ।।

यहा हैं गम के मारे वे जिन्हें सब कुछ मुअन्सर था ।।
लगा इनके दिलो में जो खंजर मैं दिखाता हूँ ।। 

जिनके हाथ है मलहम उन्हें भी घाव है गहरा ।।
छिपी मुस्कान में देखो सितमगर मैं दिखाता हूँ ।।

न राहे है ,न वादे है ,न कोई फर्ज का कायल ।।
न कोई नाम है दिल का वो बंजर मैं दिखाता हूँ ।।

यहा पर लूटने-लुटने की हसरत अब नही होती ।।
तड़पते गम की आहो का मंजर मैं दिखाता हूँ ।।

बड़ी मुद्दत से ही हमदम यहा से बच निकल पाया ।।
यही हालात हैं दिल के अक्सर मैं बताता हूँ ।।

                          R.K.M

शुक्रवार, 18 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।दिल को जलाने के लिये।।

��।।ग़ज़ल।।इस दिल को जलाने के लिये ।।��

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भरोसा तो चाहिये दोस्त मुहब्बत निभाने के लिये ।।
दिल पर पथ्थर भी रख लेंगे आजमाने के लिये ।।
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सिर्फ नज़रो के इशारों की हम तवज्जो नही करते ।।
कोई भी मिल जायेगा यहा मुस्कराने के लिये ।।
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हर बार की तरह तुम भी कुरेद जावोगे मेरे दिल को ।।
तब गम भी नही बच पायेगा गवाने के लिये ।। 
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मेरे दिल टूटने के किस्से इतने हमआम हो गये है कि
अब महफिले भी नही मिलती दर्द छुपाने के लिये ।। 
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हर बार धोखा ही पाया है अदाओ पर इल्म करके ।।
अदायें तो होती ही है बस दिखाने के लिये ।।
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गर्दिशों के दौर से गुजर आया हूँ ये मेरे दोस्त ।।
बेवज़ह वक्त बर्बाद न कर मुझे लुभाने के लिये ।।
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अब इन आँखों में प्यार की तस्वीरें नही बनती है ।।
तुम होगी कोई हशीना इस जमाने के लिये ।। 
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जा कल पूछ कर आना अपने दिल से तन्हाइयो में ।।
वरना आना ही मत इस दिल को जलाने के लिये ।।

           ✏✏✏.R.K.M

बुधवार, 16 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।दिल मज़बूर हो गया है।।

  ।।ग़ज़ल।।दिल मजबूर हो गया है ।।

हर चेहरा किसी के प्यार में नूर हो गया है ।।
इसी वज़ह से हर किसी को ग़ुरूर हो गया है ।।

ऐतराज मुझे भी नही है किसी की नज़ाक़त पर।।
पर मेरा भी दिल इसमें नासूर हो गया है ।।

भला मिलता ही क्या होगा किसी को बेवफाई से ।।
दिलो में दर्द सहकर भी खुदी से दूर हो गया है ।।

मिले थे कल तो वे बोले तुहारी याद आती है ।।
मग़र हालात के चलते ये दिल मजबूर हो गया है ।।

मुझे मालूम था सब कुछ  फिर भी मैं चला आया ।।
मुझसे दूर रहना अब उन्हें मंजूर हो गया है ।। 

गज़ब है यार ये दुनियां भरोसा अब नही होता ।।
भरोसा तोड़ देना अब यहा दरतूर हो गया है ।।

                          ....  R.K.M

शुक्रवार, 11 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।प्यार की इस नाव पर।।

   ।।ग़ज़ल।।प्यार की इस नाव पर।।

तू रहे खुश ,लुट रहा मैं ,आज तेरे नाँव पर ।।
दिल बिछाकर रो रहा हूँ गिर रहे इस भाव पर ।।

क्या पता इस कत्ल के बाद जिन्दा रह सकू मैं ।।
डगमगाता चल रहा हूँ प्यार की इस नाव पर ।।

मिल रहे थे हौसले जब तुम्हारा साथ था ।
अब नही मलहम लगाता है कोई इस घाव पर ।।

जा समझ में आ गया, यह रहम था प्यार न था ।।
पर कोई कांटा नही था गड़ रहा जो पाँव पर ।।

इस तरह फेंका है तुमने शाहिलो से दूर मुझको ।।
अब कभी न आ सकूगा राहे सकूँ की छाँव पर।।

देख तेरी रहनुमाई प्यार मैं करने लगा था   ।।
थी चार दिन की जिंदगी वो भी लगा दी दाँव पर ।।

    
                      .... R.K.M

गुरुवार, 10 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।सितमगर नही देखा ।।

  ।।ग़ज़ल।।सितमगर नही देखा।।

जिसने इश्क़ में बर्बादियो का मंज़र नही देखा ।।
मेरा दावा है ,शाहिलो पर समन्दर नही देखा ।।

कभी डूबकर बच निकला हो तो कोई बात नही ।।
दिलो में प्यार की कमियो का बंजर नही देखा ।।

बच ही नही पता कोई भी रास्ता गर्दिस में ।।
मंजिले लाख पायीं हो पर खुद का घर नही देखा ।।

बचेगा खाक दामन में ,नही तो प्यार कर देखो ।। 
किसी ने गम से बढ़कर कोई खंजर नही देखा ।। 

मग़र ऐ ! दोस्त होती है अमानत प्यार ही दिल की ।।
डरे है जो नफासत से ,मुकद्दर नही देखा ।।

तन्हा है ,उदासी है ,खमोसी में है रंजोगम ।।
खुदी के दिल से बड़कर के सितमगर नही देखा ।।

                          .....  R.K.M

बुधवार, 9 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।यादो को मिटाने वाले ।।

   ।।ग़ज़ल।।यादो को मिटाने वाले।।

नज़र भर भी नही देखा नज़रो को चुराने वाले ।।
आज फिर आये थे मेरी यादो को मिटाने वाले ।।

बड़ी उम्मीद मुझको थी उनके मुस्कराने की।। 
नाउम्मीद कर गये हर पल के मुस्कराने वाले ।।

ख़ुदा से भी बढ़कर एतबार किया करता था।।
हर वफ़ा भूल गये मुझको रुलाने वाले ।। 

बड़ा सकून मिलता उनके नजर भर उठाने से ।।
मेरी सूरत ही मिटा बैठे फ़सलों को मिटाने वाले ।। 

अब नजऱ न आया नज़रो की काशिस उनको ।।
जिसको ढूढ़ते रहते तस्वीर बनाने वाले ।। 

ये ख़ुदा कभी भी उनका चेहरा नजर न आये ।।
मुझे भूल ही जाये अब मुझको मनाने वाले ।।   

                            .. R.K.M

नशा ए इश्क

ग़ज़ल   नशा ए इश्क अब छोड़ा न जाए ।  जमाने से मगर उलझा न जाए ।   बड़ी मासूम हैं उसकी अदाएं,   कि मुझसे और अब देखा न जाए ।   गरीबों ...