।।गजल।। कसूर तुमसे है।।
मेरी हर वफा, मेरा हर गुरूर, तुमसे है ।।
कम ही पर जो भी है सुरूर तुमसे है ।। 1।।
माना कि मै आज भी गुनेहगार हू तेरा ।।
अनजाने में जो भी हुआ कसूर तुमसे है।।2।।
किसी की बद्दुवाओ की तवज्जो न की मैंने।।
पर इस दिल की दुआ जरुर तुमसे है ।।3।।
तुमे न हो मालूम तो सुन ले बेअसर दिल ।।
तुम्हारी चाहत में दिल मजबूर तुमसे है ।।4।।
अब इतना भी न कर की भरोसा भी टूट जाये ।।
फासले कुछ भी नही पर दूर तुमसे है ।।5।।
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